५१८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय तीसरा काम कर पाने योग्य स्वस्थ और स्फूर्तियुक्त बने हुए हैं। चीनने सन-यात् सेनको जन्म दिया। उन्होंने पहला और दूसरा काम पूरा किया और उनकी मृत्युके बाद उनके सुसंगठित और अनुशासित अनुयायी तीसरा काम कर रहे हैं। इटलीमें, यद्यपि विपरीत दिशा में, मुसोलिनी व्यक्तिगत रूपसे वही काम कर रहे हैं । भारतने आज संसारके आगे गांधीको अपना नेता घोषित किया है । आपने पहला काम तो पूरा किया, लेकिन दूसरा काम छोड़ दिया और इसलिए तीसरे कामका तो सवाल ही नहीं उठता। आपके संघर्षके दूसरे दौर में जो भयानक दोष है उससे हम इतने ज्यादा त्रस्त हैं कि आज हमारी स्थिति पहलेसे भी ज्यादा कठिन हो गई है आपने समाज के सबसे निम्न वर्गके हमारे देशवासियोंपर किसी अन्य व्यक्तिकी अपेक्षा अधिक गहरा और व्यापक प्रभाव डाला है । अस्तु; आपका वास्तविक उद्देश्य क्या है ? यदि आपका उद्देश्य राष्ट्रीय और राजनैतिक कार्य में अपना हिस्सा अदा करना है, तो आपको लोगोंके साथ बिलकुल बराबरीके ढंगसे सम्पर्क स्थापित करना चाहिए और आपका काम उनमें आत्मविश्वासकी भावना पैदा करना होना चाहिए। इस बातको ध्यान में रखते हुए आपको चाहिए कि आप लोगोंको इस बातकी इजाजत न दें कि वे आपको महात्मा कहें । इसके बाद एक चीज और है जो मैंने यवतमाल में देखी और जिसने मुझे बहुत ठेस पहुँचाई है। मुझे इसका कुछ थोड़ा-सा सबूत पहले भी मिला था। अस्पृश्यता- निवारणके सिलिसिलेमें आपका कार्य इस दृष्टिसे महान है कि उसमें उदात्त भावनाएँ निहित हैं और वह कार्य जैसे कि सामान्यतः चल रहा है सफलताकी दृष्टिसे भी बुरा नहीं है। फिर भी मुझे इस बातपर बड़ी आपत्ति है कि आप मेरे देशके स्त्री- पुरुषोंको अपने पाँव छूने और फिर अपनी अँगुलियोंको अपनी आँखोंमें लगानेकी इजाजत देते हैं। ऐसी स्पृश्यता तो अस्पृश्यता से भी अधिक निन्दनीय मालूम होती है । आप इन ग्रामीणोंकी मनोवृत्ति और मनोविज्ञानको अगली एक या दो पीढ़ियों तकके लिए भ्रष्ट कर रहे हैं। आप देशको सामूहिक सविनय अवज्ञाके लिए नहीं बल्कि दासोचित आज्ञा पालनके लिए और यह विश्वास करनेके लिए तैयार कर रहे हैं कि धरतीपर और इस जीवन में श्रेष्ठतर लोग, महात्मागण हैं । इस देशमें गोरे आदमीकी प्रतिष्ठा तो पहलेसे ही हमारे रास्ते में एक खतरनाक रुकावट है । राजनैतिक दृष्टि से आपका यह रवैया विनाशकारी है और मानवताकी दृष्टिसे इसका पतनकी ओर उन्मुख करनेवाला प्रभाव तो मुझे चारित्रिक संकट पैदा करनेवाला जान पड़ता है मैं आपसे यह चाहता हूँ कि आप वही अच्छे पुराने गांधी बन जायें; आप खादीका साधारण पायजामा और कोट पहनकर बाहर आइए- जाइए तथा हम लोगोंके साथ साधारण ढंगसे काम कीजिए। आइए और हमारे साथ (क्योंकि आप स्वयं अकेले असफल हो गये हैं) हमारे कार्यकर्त्ताओं, हमारे किसानों और हमारे नवयुवकोंको संगठित कीजिए। इसके लिए आध्यात्मिक भावुकताका नहीं, बल्कि एक निश्चित उद्देश्य, एक स्पष्ट और सुनिर्दिष्ट प्रयोजनका और जिनके प्रयोगसे सभी लोगोंको सफलता मिली है, उन उपायोंका सहारा लीजिए । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५५६
दिखावट