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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५६७

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तारीखवार जीवन-वृत्तान्त ५२९ २६ मार्च : शाम डा० वेन्लेसने गांधीजीकी जाँच-पड़तालकी और पूर्ण विश्राम करनेकी सलाह दी। २७ मार्च: दिन-भर रक्तचाप बढ़ा रहा । २८ मार्च : डाक्टरोंने एकमत होकर यह राय दी कि ग्रीष्मकालीन सारा कार्यक्रम रद कर दिया जाये । 'यंग इंडिया' के अपने लेखमें गोरक्षाकी शर्तोंपर प्रकाश डाला । १ अप्रैल : बेलगाँव पहुँचे । २ अप्रैल : अम्बोली पहुँचे । ३ अप्रैल : डा० जीवराज मेहताने गांधीजीकी जांच-पड़ताल की और किसी पहाड़ी स्वास्थ्य वर्धक स्थानपर जानेकी सलाह दी। ७ अप्रैल : 'यंग इंडिया के अपने लेख " में क्या करूँ ? " में घोषणा की : " निस्सन्देह सत्याग्रहकी नींव भी राष्ट्र-निर्माणकी नींव के समान आत्मशुद्धि, आत्मसमर्पण और आत्मत्याग है ।' 33 ८ अप्रैल : अमृतलालको लिखे अपने पत्रमें उन्होंने बताया कि “ आजकल मेरा मन खादी आदि रचनात्मक कामोंके सिवाय अन्य कामोंमें नहीं लगता है । ९ अप्रैल : थोड़ा टहले । १० अप्रैल : काफी दूर पैदल चले । १४ अप्रैल : 'यंग इंडिया' के अपने लेख " बुद्धि बनाम श्रद्धा " में लिखा : " आदमी केवल शरीर ही नहीं है, बल्कि उससे कई गुना ऊँची चीज है । १७ अप्रैल : सावन्तवाड़ीके प्रमुखसे बातचीत । १८ अप्रैल : अम्बोलीसे नन्दी हिल्सको रवाना हुए। १९ अप्रैल : नन्दी हिल्स पहुँचे । २० अप्रैल : मैसूर राज्यके महा शिक्षा-निरीक्षकसे भेंट की । 33 " २१ अप्रैल : 'यंग इंडिया' के अपने लेख " सत्य एक है " में लिखा: “ मैं प्रत्येक देशकी स्वाधीनताको उसी अर्थ में और उतने ही अंशोंमें सत्य मानता हूँ जिस अर्थमें और जितने अंशोंमें प्रत्येक मनुष्यकी स्वाधीनताको । ” २५ अप्रैल : सतीशचन्द्र दासगुप्तको लिखे अपने पत्रमें गांधीजीने लिखा “बिना सोचे- समझे या बिना डाक्टरोंकी रायके किसी सक्रिय काममें नहीं जुट जाऊँगा । " २६ अप्रैल : आर० बी० ग्रेगको लिखे अपने पत्रमें उन्होंने बताया कि " सूर्यसे पके फलों अथवा गिरीवाले फलोंपर आग का इस्तेमाल किये बिना निर्वाह करनेसे पाशविक वासनाका सचेतन मनसे शमन हो जाता है । २ मई : डाक्टरोंने गांधीजीकी जाँचकी और उनका रक्तचाप सामान्य पाया गया । ८ मई : 'नवजीवन के अपने लेख " गाय बनाम भैंस " में " शहरोंमें चर्मालय और दुग्धालयका प्रयोग धार्मिक तथा सामाजिक दृष्टिसे" करने की सलाह दी। १० मई : सकलातवालाको लिखे अपने पत्र में उन्होंने यह विचार प्रकट किया कि भारत में श्रमिक वर्ग अब भी अत्यन्त असंगठित है । ' ३३-३४ 13 Gandhi Heritage Portal