५३० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय ११ मई : फूलचन्द शाहको लिखा कि " मेरी आज्ञा के बिना सत्याग्रह न करें। " १२ मई : 'यंग इंडिया' में लिखी "टिप्पणियों" के उपशीर्षक "मशीनी धान कुटाईसे हानि " में गांधीजीने “ पश्चिम के इन्द्रजालमें हृदसे ज्यादा सम्मोहित हो जाने " के लिए भारतीयोंकी भर्त्सना की । १९ मई : 'यंग इंडिया' के अपने लेख "नागपुरका सत्याग्रह" में उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने कभी नागपुर में सविनय अवज्ञा करनेकी सम्मति दी थी तथा सब लोगोंको चेतावनी दी कि उनकी लिखितमें अनुमति लिये बिना किसी भी आन्दोलनके साथ उनका नाम न जोड़ा जाये । २२ मई : 'नवजीवन' के अपने लेख " नौकरीसे अलग किया जाये" में उन्होंने बताया : अहिंसा धर्म न तो कायरोंका धर्म है और न मूर्खोका । वह तो ऐसे लोगोंका धर्म है जो चौबीसों घंटे जाग्रत रहते हैं । " यदि गरीबसे गरीब २६ मई : 'यंग इंडिया' में " अपील : भारतीय जनताके नाम " में उन्होंने कहा : हम स्वाधीन और स्वाभिमानी राष्ट्र बनना चाहते हैं तो बहनकी आबरू भी हमारे लिये उतनी ही मूल्यवान और प्रिय होनी चाहिए जितनी अपनी सगी बहनकी होती है । " २८ मई : गुलजारीलाल नन्दाको लिखे अपने पत्र में गांधीजीने बताया कि "" भगवद्- गीता' एकमात्र सन्दर्भ कोष" है । ५ जून : नन्दी हिल्ससे नीचे आये । चिकबल्लापुर में भाषण । बंगलोर पहुँचे । १२ जून : सतकौड़ोपति रायको लिखा कि सामाजिक सुधार हमारे स्वतन्त्रता संघर्ष के अत्यन्त आवश्यक अंग हो गये हैं । १५ जून : दक्षिण आफ्रिकी संघ विधान सभामें भारतीय विधेयकोंपर बहस शुरू हुई । गुलजारीलाल नन्दाको लिखे अपने पत्र में गांधीजीने कहा कि मजदूरोंको "स्वतन्त्र रूपसे अपनी दशा सुधारनी चाहिए" और मिल मालिकोंके साथ “ मान एवं स्वाभिमान" के अनुरूप समझौता वार्ता जारी रखी जाये । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५६८
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