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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५१८

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४८२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय सहयोगका प्रतीक है और इस आश्वासन के साथ में आपकी थैलीको सचमुच बड़ी मूल्यवान मानता हूँ और मुझे यह जानकर और भी ज्यादा खुशी हुई है कि अकेले ही सबसे अधिक चन्दा जमा करनेका श्रेय एक छात्राको' है । सचमुच मेरी यही इच्छा है कि देशसेवाके काममें भारतकी सभी तरुणियाँ यहाँके सभी तरुणोंसे आगे निकलकर दिखा दें। सेवाके क्षेत्रमें महिलाएँ आगे क्यों न रहें ? आपकी थैली मुझे कुछ सिखाती है और आपको भी इससे एक सीख लेनी चाहिए। वह मुझे तो यह सिखाती है कि विद्यार्थियोंसे इतनी सारी राशियाँ लेनेके बाद मुझे आप लोगोंके प्रति ही नहीं, भूखों मरती असंख्य जनताके प्रति भी अपना दायित्व और ज्यादा अच्छी तरह समझना चाहिए। आप इससे यह सीख लें कि इस थैलीके लिए अपनी-अपनी शक्ति-भर देनेके बाद आपको इन करोड़ों ग्रामवासियोंकी दशाका अध्ययन करना चाहिए, जिससे कि आप अपनेको उनकी सेवाके अधिक उपयुक्त बना सकें। और यदि आप यह करेंगे तो आपको इस पीड़ाजनक तथ्यका पता चलेगा कि आपकी शिक्षाका खर्च इन करोड़ों ग्रामवासियोंकी खून-पसीने की कमाईसे ही चलता है । आशा है, यहाँ भी हर विद्यार्थीको मालूम है कि वह अपनी शिक्षा के लिए जो फीस देता है, इससे उसकी शिक्षापर होनेवाले पूरे व्ययका भुगतान किसी भी तरह नहीं किया जा सकता। आशा है, विद्यार्थी यह भी जानते-समझते हैं कि शिक्षाका व्यय शराब और नशीली चीजोंसे प्राप्त होनेवाले राजस्वसे पूरा किया जाता है । अब आप खुद सोचिए कि आपकी शिक्षाके लिए पैसा जुटानेवाले इन लोगोंके आप कितने ऋणी हैं। इसलिए मेरा सुझाव है कि आपको इन करोड़ों क्षुधार्त देश- भाइयोंकी अनथक सेवा करनी चाहिए और आपको तबतक चैनकी साँस नहीं लेनी चाहिए जबतक कि यह जानलेवा गरीबी देशसे दूर नहीं हो जाती । और में आपको बतला चुका हूँ कि इसे दूर करनेका सबसे आसान और एकमात्र साधन खद्दर ही है । यन्त्रोंके वर्चस्वके इस युगमें चरखा और खादीके विरुद्ध ऊपरसे सही और सुन्दर दिखनेवाले तरह-तरह के तर्क प्रस्तुत किये जायेंगे। आपको उनसे भ्रमित नहीं होना चाहिए। चरखा और खादीके पक्षमें दिये जा सकनेवाले सभी तर्कोंपर में यहाँ विचार नहीं करना चाहता, लेकिन मैं चाहूँगा कि आप सब इस विषयपर एक छोटी-सी पुस्तिका देखें । वह पुस्तिका अखिल भारतीय चरखा संघकी ओरसे प्रकाशित हुई है और उसके लेखक दो अध्येता, प्रो० पुणताम्बेकर और श्री एन० एस० वरदाचारी हैं। आपको उस पुस्तिकामें अधिकांश तर्क बड़े सुविचारित ढंगसे एक क्रममें सँजोये हुए मिल जायेंगे । तर्कोंके आधारपर सिद्ध किया गया है कि देशमें मौजूद भुखमरीके व्यापक दुःखको कम करनेका एकमात्र साधन खादी और केवल खादी ही बन सकती है। यहाँ मैंने अपने आशयको सुनिश्चित बनानेके लिए जिन दो शब्दों अर्थात् 'व्यापक' और 'कम करना' का प्रयोग किया है, उन्हें आप ध्यान में रखें। ऐसा न करें कि इनका ध्यान रखे बिना आप खादीके पक्षमें कोई ऐसा तर्क प्रस्तुत कर दें जैसा तर्क कभी किसी खादी-समर्थकने दिया ही नहीं है और फिर १. लॉ कालेजकी कु० आनन्दाबाईने डेढ़ सौ रुपये अकेले ही जमा किये थे । Gandhi Heritage Portal