भाषण : वाई० एम० सी० ए०, मद्रास में ४८७ समझकर में व्यापारियों और जनताको सावधान करता हूँ। विलायती कपड़ा बाजार में है, इसके लिए गुजराती और मारवाड़ी उत्तरदायी हैं । यह बात दोनोंके लिए विचारणीय है । विलायती कपड़ेकी बाढ़ और अतिवृष्टिसे होनेवाली बाढ़ में यदि कोई मुझे चुनाव करनेके लिए कहे तो मैं जानता हूँ कि मैं क्या पसन्द करूँगा । पाठकोंको जानना चाहिए कि जो बाढ़ शरीरका हनन करती है, वह सह्य है और उसका निवारण नहीं किया जा सकता। दूसरी बाढ़ जो आत्माका हनन करती है उसका निवारण किया जा सकता है। दो बाढ़ोंके इस महान् भेदको गुजरातको कौन समझाये ? शरीरकी रक्षाके बारेमें मनुष्य सदा परतन्त्र है, आत्माकी रक्षाके विषय में वह सदैव स्वतन्त्र है । इसीसे विभिन्न धर्म डंकेकी चोट कहते हैं : 'आत्मा ही आत्माका रक्षक और भक्षक है | [ गुजरातीसे ] नवजीवन, ४-९-१९२७ मित्रो, ४०७. भाषण : वाई० एम० सी० ए०, मद्रासमें ' [ ४ सितम्बर, १९२७] सभापति महोदयका अनुरोध है कि मैं यहाँ धार्मिक प्रवचन करूँ। में नहीं समझता कि मैंने कभी धार्मिक प्रवचन किया हो या दूसरी तरहसे कहिए तो मुझे अपना कोई भी ऐसा भाषण याद नहीं पड़ता कि जो धार्मिक न रहा हो। अगर यह मेरा भ्रम न हो तो मैं तो यह समझता हूँ कि मैंने अपने सार्वजनिक जीवनके आरम्भसे अबतक जो कुछ कहा है और जो कुछ किया है, उसके पीछे एक धार्मिक चेतना, धार्मिक उद्देश्य सदा रहा है । हो सकता है कि मेरे श्रोताओंको या जो पाठक शब्दोंके अर्थको नहीं, बल्कि सिर्फ शब्दोंको पढ़ते हैं, ऐसे लोगोंको मेरे लेख राजनीतिक, आर्थिक और अन्य कई तरहके लगे हों। पर मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मेरे इस कथनपर विश्वास करें कि मेरा प्रत्येक शब्द मूलतः और मुख्यतः धार्मिक उद्देश्य से ही अनुप्राणित रहा है । और आज सुबह भी ऐसा ही रहेगा । मेरे यह पूछनेपर कि लोग मुझसे क्या सुननेकी आशा रखते हैं, मुझसे कहा गया कि मैं जिस विषयपर चाहूँ, बोलूं । पर, यह सन्देश मुझे आज सुबह सभाके लिए आते समय ही मिला, इसलिए मैं कोई एक क्रम निश्चित किये बिना अपने विचार आपके सामने उसी रूपमें पेश करता हूँ जिस रूपमें वे मेरे दिमाग में आ रहे हैं । हुआ था। १. यंग मैन्स क्रिश्चियन एसोसिएशन में दिया गया यह भाषण " दो भाषण" शीर्षकसे प्रकाशित २. और ३. हिन्दू, ५-९-१९२७ से । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५२३
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