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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५२८

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

उन्होंने अभी अपनी सारी शर्म-हया नहीं छोड़ी है, मगर मैं सच कहता हूँ, हमने छोड़ दी है। हम इतने सारे कपड़े पहनकर भी वास्तव में नंगे हैं, उन्होंने कोई कपड़ा न पहनकर भी अपनेको ढँक रखा है। इन्हीं बहनोंके लिए मैं जगह-जगह मारा-मारा फिर रहा हूँ, अपने देशवासियोंको खुश करनेकी कोशिश करता हूँ, अमेरिकी मित्रोंको प्रसन्न करनेका प्रयत्न करता हूँ। मैंने इसी तरह हारवर्डसे आये दो किशोरोंका मनोरंजन किया था। उन्होंने मुझसे मेरे हस्ताक्षर माँगे। मैंने कहा, "नहीं, मैं अमेरिकियोंको हस्ताक्षर नहीं देता।" आखिर हमने एक सौदा किया, "मैं आपको अपने हस्ताक्षर देता हूँ; बदलेमें आप खादीको अपनाइए।” उन्होंने मुझे वचन दिया है और अमेरिकियोंके वचनपर मुझे पूरा भरोसा है। उनमें से बहुत-से लोग यह काम कर रहे हैं — और आप भ्रममें न रहिए, वे इसे सचमुच पसन्द भी करते हैं।

लेकिन मैं सन्तुष्ट नहीं हो सकता — तबतक नहीं जबतक कि भारतका एक-एक पुरुष, एक-एक स्त्री चरखा नहीं चलाने लग जाती। अगर आपको इसका इससे कोई अच्छा विकल्प मिल जाता है तो आप चरखेको जला दीजिए। यह एक ऐसा साधन, बल्कि एकमात्र ऐसा साधन है जो करोड़ों लोगोंकी जरूरतोंको पूरा कर सकता है और इस तरह कि उन्हें अपने घर-बार छोड़कर कहीं और जाना भी न पड़े। यह काम बहुत बड़ा है और मैं जानता हूँ कि मैं इसे नहीं कर सकता। लेकिन मैं यह भी जानता हूँ कि ईश्वर इसे कर सकता है। बड़े से बड़ा और कठिन से कठिन काम भी, जब उसकी मर्जी हो, तो बहुत आसान बन जाता है। वह पलक झपकते सबको नष्ट कर सकता है, उसी तरह जिस तरह उसने अभी गुजरातमें हजारों घरोंको नष्ट कर दिया और जिस तरह कुछ साल पहले दक्षिण भारतमें हजारों घरोंको बरबाद कर दिया था। ईश्वरमें, अतएव उसकी सृष्टि मानवमें पूरा विश्वास रखकर, खादी और चरखेका यह सन्देश मैं आपके लिए लाया हूँ। आज आप चाहें तो मुझपर हँस सकते हैं। आप चाहें तो इसे तुच्छ काम कह सकते हैं। आप चाहें तो मुझमें अविश्वास भी कर सकते हैं और कह सकते हैं कि यह तो कोई राजनीतिक पैंतरेबाज है, जो वैसे कहनेको तो हमारे सामने खद्दरको पेश करने आया है, लेकिन इसकी आस्तीनमें और भी बहुत-बहुत चीजें छिपी हुई हैं। आप मुझे गलत भी समझ सकते हैं, मेरे सन्देशका गलत अर्थ भी लगा सकते हैं। आप कह सकते हैं : 'हम लोग इतने कमजोर हैं कि हमसे यह सब नहीं हो सकता, हम बहुत गरीब हैं।' मैं जानता हूँ कि आप तर्क देकर मुझे अवश कर सकते हैं, मेरा मुँह बन्द कर सकते हैं। लेकिन, जबतक ईश्वरमें मेरा विश्वास है, आपमें भी मैं अपना विश्वास नहीं त्याग सकता। ईश्वरमें विश्वास छोड़ना मेरे लिए असम्भव है और इसलिए खादी और चरखेमें भी मैं अपना विश्वास नहीं छोड़ सकता।

यदि मैं अब भी अपने हृदयकी बात आपको नहीं समझा पाया हूँ, यदि मैं अब भी आपको खादीके सन्देशकी परम आध्यात्मिकताकी प्रतीति नहीं करा पाया हूँ तो मैं नहीं समझता कि अब और कभी वैसा कर पाऊँगा। मैं तो इतना ही कह सकता हूँ कि मैं सफल होनेका इरादा लेकर ही चल रहा हूँ। मेरे होंठ यह सन्देश