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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५३३

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४९७
पत्र : मीराबहनको

ऐसा यज्ञ तो चरखेके अतिरिक्त कुछ और हो ही नहीं सकता। लेकिन मैं आपको 'गीता' पर प्रवचन नहीं देना चाहता। मैं आपको सिर्फ यह बताना चाहता हूँ कि यदि आप आदिसे अन्ततक 'गीता' का अध्ययन करें तो आप पायेंगे कि उसमें ईश्वर-भक्तके बुनियादी गुण बड़े ही सरल और सीधे शब्दोंमें गिनाये गये हैं — जैसे ब्रह्मचर्य, सत्य, अहिंसा, अभय आदि। मैं अन्तमें यही परामर्श देता हूँ कि आपको 'गीता' का अध्ययन छिद्रान्वेषी बुद्धिसे नहीं, बल्कि प्रार्थनाके भावसे करना चाहिए और उसकी हिदायतोंपर अमल करना चाहिए।

[अंग्रेजीसे]

हिन्दू, ५-९-१९२७

४१०. तार : मीराबहनको

मद्रास ५ सितम्बर, १९२७

सेवामें

मीराबहन

सत्याग्रहाश्रम, वर्धा

दुःख है बुखार हठीला सिद्ध हो रहा है। डाक्टर जो दवा बतायें अवश्य लो। सस्नेह।

बापू

अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू० ५२६८) से।

सौजन्य : मीराबहन

४११. पत्र : मीराबहनको

५ सितम्बर, १९२७

चि० मीरा,

अभी-अभी जमनालालजीका तार मिला। लगता है, बुखार तो तुम्हारा पीछा छोड़नेका नाम ही नहीं लेता। डाक्टर जो दवा बतायें उन्हें लेनेमें आपत्ति न करना। यही तुम्हारे लिए अच्छा होगा। तुम आज जिन परिस्थितियोंमें हो उन परिस्थितियोंमें तुम्हें डाक्टर द्वारा बताई गई दवा लेनेमें आपत्ति क्यों नहीं करनी चाहिए, इसके बहुत-से सूक्ष्म कारण हैं।

मुझे तो लगता है कि शायद तुम्हारे दिमागपर बहुत बोझ पड़ गया है। हो सकता है कि तुमने मासिक धर्मके दौरान अलगावकी बातको लेकर और आश्रम में

४९७
पत्र : मीराबहनको

ऐसा यज्ञ तो चरखेके अतिरिक्त कुछ और हो ही नहीं सकता। लेकिन मैं आपको 'गीता' पर प्रवचन नहीं देना चाहता। मैं आपको सिर्फ यह बताना चाहता हूँ कि यदि आप आदिसे अन्ततक 'गीता' का अध्ययन करें तो आप पायेंगे कि उसमें ईश्वर-भक्तके बुनियादी गुण बड़े ही सरल और सीधे शब्दोंमें गिनाये गये हैं — जैसे ब्रह्मचर्य, सत्य, अहिंसा, अभय आदि। मैं अन्तमें यही परामर्श देता हूँ कि आपको 'गीता' का अध्ययन छिद्रान्वेषी बुद्धिसे नहीं, बल्कि प्रार्थनाके भावसे करना चाहिए और उसकी हिदायतोंपर अमल करना चाहिए। [अंग्रेजीसे]

हिन्दू, ५-९-१९२७

४१०. तार : मीराबहनको

मद्रास ५ सितम्बर, १९२७

सेवामें

मीराबहन

सत्याग्रहाश्रम, वर्धा

दुःख है बुखार हठीला सिद्ध हो रहा है। डाक्टर जो दवा बतायें अवश्य लो। सस्नेह।

बापू

अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू० ५२६८) से।

सौजन्य : मीराबहन

४११. पत्र : मीराबहनको

५ सितम्बर, १९२७

चि० मीरा,

अभी-अभी जमनालालजीका तार मिला। लगता है, बुखार तो तुम्हारा पीछा छोड़नेका नाम ही नहीं लेता। डाक्टर जो दवा बतायें उन्हें लेनेमें आपत्ति न करना। यही तुम्हारे लिए अच्छा होगा। तुम आज जिन परिस्थितियोंमें हो उन परिस्थितियोंमें तुम्हें डाक्टर द्वारा बताई गई दवा लेनेमें आपत्ति क्यों नहीं करनी चाहिए, इसके बहुत-से सूक्ष्म कारण हैं। मुझे तो लगता है कि शायद तुम्हारे दिमागपर बहुत बोझ पड़ गया है। हो सकता है कि तुमने मासिक धर्मके दौरान अलगावकी बातको लेकर और आश्रममें ३४-३२