भाषण : मद्य-निषेधके बारेमें, मद्रास में ५०३ देखनेकी बात मुझे जँचती नहीं। मुझे तो यही लगता है कि मन्त्री महोदय एक-दो जिलोंमें ऐसा परीक्षण करेंगे और यदि उसमें सफलता न मिली तो कहा जायेगा कि अब इसका कभी परीक्षण नहीं किया जायेगा, वह कभी भी सफल नहीं हो सकता । आप सही कामको गलत तरीकेसे करें और फिर गलत तरीकेको दोष देनेके बजाय सही काम में ही दोष दिखाने लगें, यह तो ठीक बात नहीं है। देश मद्य-निषेधके पक्षमें है । यदि मद्य-निषेधके पक्षमें लाखों-लाख लोगोंके हस्ताक्षर जमा करनेसे ही कोई बात सिद्ध होती हो, तो वह तो मात्र संगठनका सवाल है । मैंने तो देशमें कहीं किसी स्थानपर मद्य-निषेधके विरुद्ध जनताको आवाज उठाते नहीं सुना। हाँ, रुपये-पैसेके जोरपर कोई झूठ-मूठका आन्दोलन खड़ा कर दिखाये तो बात दूसरी है । ऐसे देशी राज्य हैं, जहाँ कुछ इलाकोंमें मद्य-निषेध कर दिया गया है, लेकिन उन इलाकों में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं निकला जो आगे आकर कहता : हम चाहते हैं कि कमसे कम एक दुकान तो यहाँ खोली जाये।" एक राज्यमें ह्विस्की और ब्रांडीका सेवन करनेवाले यूरोपीयोंको मद्य-निषेधसे विमुक्ति दे दी गई है। पर इस मामले में हम एक बड़ी कठिन स्थिति में पड़े हुए हैं, इसलिए कि हमारे शासक या गवर्नर लोग शराब पीना अपराधपूर्ण या अनैतिक नहीं मानते। मेरे भी कुछ अंग्रेज मित्र हैं जो मद्य-निषेधकी मेरी बातोंका मखौल उड़ाते हैं । मेरे दिलमें उनके लिए बड़ा सम्मान है । वे शायद समझते हैं कि अगर पीनेमें थोड़ा संयम रखें, ज्यादती न करें तो वे होश- हवास नहीं खोयेंगे और इंसानियत नहीं छोड़ेंगे। मैंने खुद देखा है कि मेरे ये मित्र होश-हवास खो बैठते हैं और इंसानियत छोड़कर पशु भी बन जाते हैं। मैंने अपने कई मित्रोंको शराब पीनेके दौरान उच्छृंखल होते देखा है । वैसे वे बहुत ही बढ़िया किस्मके आदमी हैं, पर पीकर वे निरे गधे बन जाते हैं। उत्तरी ध्रुवके पासके प्रदेशों में शराब जैसे गर्मी देनेवाले पेयका सेवन करना किसी हदतक माफ भी किया जा सकता है, लेकिन हमारे देश में तो शराबकी कतई कोई जरूरत नहीं है । फिर भी यहाँ मद्य-निषेधके विरुद्ध एक तरहका आन्दोलन चल रहा है । [किसीने ] मेरे पास मद्य-निषेधके विरुद्ध प्रकाशित ढेर-सी प्रचार पुस्तिकाएँ भेजी थीं। उनमें लेखक इत्यादिका नाम नहीं दिया गया था। उनमें शराबकी प्रशस्ति-सी की गई थी । कायदेसे थोड़ी शराब पीनेके पक्षमें चिकित्सकों और विभिन्न धर्म-ग्रन्थोंके उद्धरण उनमें जुटाये गये हैं और सारी सामग्री इतने लुभावने और आकर्षक ढंगसे पेश की गई है कि समझसे काम न लेनेवाला व्यक्ति आसानीसे शराबखोरीके जालमें फँस सकता है । -- यदि मद्य-निषेधपर आपका विश्वास इतना ही कट्टर और अदम्य हो जितना मेरा है और आप देशके कोने-कोने में मद्य-निषेधके लिए प्रचार करने लगें तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी। हम लोगोंको आमद-खर्चकी दलीलके जालमें नहीं फँसना चाहिए। यह जाल हमारे लिए ही बिछाया गया है। हमारी स्थिति बिलकुल स्पष्ट होनी चाहिए। खर्चके लिए आमदनी जुटाना हमारा काम नहीं। शुरूमें ही जिन लोगोंने भयंकर भूल की है, उन्हींको अपने कदम पीछे हटाने चाहिए। आमद खर्चकी Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५३९
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