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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५४०

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५०४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय समस्या से निकलनेका भी एक उपाय है । आप फौजपर खर्च होनेवाले करोड़ों-करोड़ रुपये में से २५ करोड़ निकाल दें। फौजपर होनेवाला खर्च दिनों-दिन बढ़ता ही रहा है। आप यदि एक सारणी बनाकर देखें तो पता चलेगा कि इस खर्चमें किस तरह बेहिसाब बढ़ोतरी हुई है। उस खर्चमें आप काफी कटौती कर सकते हैं। मैं इसके राजनीतिक इतिहासकी बात यहाँ नहीं करूँगा । आबकारीसे होनेवाली आमदनी में जितना भी घाटा पड़े, उसकी पूर्ति फौजपर होनेवाले खर्चकी कटौतीसे ही होनी चाहिए, अन्य किसी मदसे नहीं। इसके लिए अतिरिक्त कर नहीं लगाये जाने चाहिए। उसका नतीजा यह होगा कि दस सालके अरसेमें ही सरकारकी आमदनी में काफी अधिक वृद्धि हो जायेगी। मद्य-निषेधका प्रयोग करनेवाले देशोंका भी यही अनुभव है। मद्यपान कायम रहनेसे जिनका स्वार्थ-साधन होता है, वे अखबारोंमें इस आशयके लेखादि प्रकाशित करवाते रहते हैं कि अमेरिकामें पूर्ण मद्य-निषेध सर्वथा असफल रहा है । आप उनपर विश्वास मत कीजिए। भारत में जो अमेरिकी आते हैं उनमें शायद ही कोई ऐसा हो जो मुझसे मिले बिना देश लौटता हो । इन अमेरिकी लोगों और वहाँकी मद्य-निषेध लीग द्वारा प्रकाशित साहित्य से इस बातका पूरा प्रमाण मिलता है कि मद्य-निषेधका परिणाम देशके लिए कुल मिलाकर लाभदायक रहा है। हाँ, यह सच है कि उसके उतने शानदार, बड़े-बड़े परिणाम नहीं निकल पाये जितने उन्होंने सोच रखे थे । अमेरिकामें लोकमतका कोई भी हिस्सा मद्य-निषेध उठा लिये जानेका समर्थक नहीं है। उनकी अपनी सरकार है और लोग वहाँकी वस्तुस्थिति से सन्तुष्ट हैं । वहाँका मजदूर संयम और ईमानदारीका जीवन बिताता है । क्या राजस्वकी हानि का औचित्य ठहराने के लिए इतना पर्याप्त नहीं ? संसारके एक अन्य भागमें ऐसी परिस्थिति है, पर दुर्भाग्यकी बात कि भारत में नहीं है। मद्य-निषेधका परीक्षण करनेवाले देशोंका अनुभव यह है कि उससे लोग पहलेकी अपेक्षा ज्यादा अच्छे बन गये और देशको कोई बहुत बड़ी आर्थिक हानि भी नहीं हुई । यदि भारतमें मद्य-निषेध कर दिया जाये तो यहाँ भी कोई मुसीबत, कोई आर्थिक संकट नहीं आ जायेगा । हममें से प्रत्येकका यह पवित्र कर्त्तव्य है कि हमसे बन पड़े तो हम देशसे शराबखोरीको बिलकुल ही दूर कर दें। यदि मेरे हाथमें शक्ति होती और मेरी चलती तो मैं आज ही ऐसा कर दिखाता । अब में धरनेका प्रश्न लेता हूँ। मैं मानता हूँ कि कुछ धरनोंमें हिंसासे काम लिया गया था; लेकिन सरकारने धरनोंको बरदाश्त नहीं किया, इसका असली कारण यही था कि उससे उसकी आमदनी घटती थी। बिहार के लोगोंने एकाएक शराब छोड़ दी और निष्ठापूर्वक धरनेका समर्थन करने लगे । असम में भी यही हुआ। कुछ दिनोंके लिए अफीमचियोंके अड्डोंपर ताले पड़ गये। सरकार यह सब भला चुप बैठी कैसे देख सकती थी ? धरने उपयोगी और आवश्यक थे, और इससे भारतको काफी लाभ हुआ, इस बात के काफी प्रमाण मौजूद थे । इसने सिद्ध कर दिया कि मद्य-निषेध सम्भव है। अमेरिकामें मद्य-निषेधने जबरदस्त आध्यात्मिक जागृतिको जन्म दिया है। लेकिन अमेरिकामें वह आध्यात्मिक चेतना पैदा करनेका काम काफी कठिन था । Gandhi Heritage Portal