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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५४३

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४१८. बातचीत : नीलकी मूर्ति हटानेका आन्दोलन करनेवाले स्वयंसेवकोंसे मद्रास ६ और ७ सितम्बर, १९२७ आज हम महात्मा गांधीकी स्वीकृति से नीलकी मूर्ति हटानेके आन्दोलनसे सम्बन्धित स्वयंसेवकोंकी उनके साथ हुई बातचीत की पूरी रिपोर्ट छाप रहे हैं। बातचीत मद्रासमें मंगलवार और बुधवारको हुई थी । 'हिन्दू' का प्रतिनिधि बातचीत के दौरान उपस्थित था । उसने वहीं के वहीं सारी बातचीतको दर्ज कर लिया था । फिर उसकी लिखी चीजका महात्मा गांधीने संशोधन किया । तमिलनाड स्वयंसेवक दलके कोई २० सदस्योंने, जो इन दिनों नगरसे नीलकी मूर्ति हटवानेके आन्दोलनमें लगे हुए हैं, मंगलवारको तीसरे पहर इस विषयपर घंटे- भरसे कुछ अधिक समयतक महात्मा गांधीसे बातचीत की। उस दिन बातचीत खत्म नहीं हो सकी और फिर उन्होंने अगले दिन भी बातचीत की। श्री के० कुलन्दाईने इन नौजवानोंके नेताके रूपमें महात्माजीको अपना परिचय देते हुए बताया कि वे इस आन्दोलनमें कैसे पड़े। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेटने इन युवकोंको जो अमानवीय दण्ड सुनाया उससे उनका मन बहुत त्रस्त और व्यथित हो गया और उन्हें लगा कि एक कांग्रेसी और जिला कांग्रेस कमेटीके मन्त्रीके नाते इन्हें सहायता और सलाह देना उनके लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि वे किसी प्रतिज्ञासे बँधे हुए नहीं हैं और अपनेको गिरफ्तार भी नहीं करवा रहे हैं । गांधीजी : इस सम्बन्ध में शायद एक या दो लोगोंको दो-दो वर्षके कठोर कारा- वासका दण्ड दिया गया है न ? श्री कुलन्दाईने इसका उत्तर 'हाँ' में देते हुए कहा कि हमारे हस्तक्षेपके परिणाम- स्वरूप बहुत कठोर दण्ड नहीं दिया गया । कुलन्दाई : अबतक इस सम्बन्धमें २७ लोग जेल जा चुके हैं, जिनमें से दो महि- लाएँ हैं। इनमें से अधिकांशने मदुरामें, तलवार सत्याग्रहके नामसे प्रसिद्ध आन्दोलन में भाग लिया था । इस दलमें कुल २०० व्यक्ति शामिल हैं। ये मुख्यतः मदुरा और रामनाड जिलोंके हैं । नीलकी मूर्तिको तोड़नेकी बात पहले-पहल किसके मनमें आई ? उत्तरमें बताया गया कि यह बात पहले-पहल सोमयाजुलु और श्रीनिवास- वरदनके मनमें आई । यह मदुरा आन्दोलनकी विफलताके बाद की बात है न ? Gandhi Heritage Portal