५०८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय एक स्वयंसेवक : हम मदुरामें विफल तो नहीं हुए। हम लोग खुले आम सड़कों- पर तलवार लेकर निकलते थे और हमें किसीने गिरफ्तार नहीं किया । इस तरह हमने शस्त्र अधिनियमको सफलतापूर्वक तोड़ा। इसपर महात्माजी अपनी हँसी नहीं रोक पाये और उन्होंने उनसे कहा कि आप इस भ्रम में न रहिए कि आपका वह आन्दोलन सफल हुआ । जब सरकारने देखा कि आप लोग जो तलवारें लेकर निकलते हैं, वे तो महज टीनकी तलवारें हैं और आपको जनताका समर्थन प्राप्त नहीं है, तो फिर उसने यही सोचा कि आपको रोककर वह व्यर्थ ही आपको विज्ञापन और महत्त्व क्यों दे । सो उसने आपको अपने मनकी करने दी । इसलिए यह कहना बेकार है कि चूंकि आपको गिरफ्तार नहीं किया गया इसलिए आप सफल रहे । आपका उद्देश्य तो तब पूरा हो जब सरकार शस्त्र अधिनियमको हटा दे और हर भारतीयके लिए शस्त्र लेकर चलना सम्भव हो जाये। लेकिन, याद रखिए कि यह कभी होनेवाला नहीं है । स्वराज्य सरकारका काम भी शस्त्र अधिनियम के बिना नहीं चल सकता। कुछ-न-कुछ अंकुश तो रहना ही चाहिए । इसलिए मैं तो कहूँगा कि आप यही मानें कि मदुरा सत्याग्रह विफल हो गया । भविष्य में हम सफल हो सकें, इसके लिए अपनी पहलेकी विफलताको स्वीकार कर लेना अच्छा है । इसके बाद महात्माजीने स्वयंसेवकोंको सत्याग्रहको समझको परखने के लिए एक-दो स्वयं सेवकोंसे एक-दो सवाल पूछे । इसीलिए मैंने आपसे सत्याग्रहकी परिभाषा बताने को कहा। जबतक आप उसकी 'यंग इंडिया' में बताई परिभाषाको स्वीकार नहीं करते और उसे सीख नहीं लेते तब- तक आप सत्याग्रह-संघर्ष में सफल होनेवाले नहीं हैं। यदि आप सत्याग्रहकी सच्ची भावनासे ओतप्रोत होंगे तो में आपका समर्थन करूँगा; बल्कि सारा देश आपके साथ रहेगा । इस सम्बन्ध में मैं आपको व्यावहारिक महत्त्वकी एक बात बता दूँ। आप इस समय सार्वजनिक संगठनोंसे ऐसी अपेक्षा न रखें कि वे आपका मार्गदर्शन करेंगे या सत्याग्रहके मामले में आपका साथ देंगे ।.. इसपर उपस्थित स्वयंसेवकोंमें से एकने पूछा : क्या इन संगठनोंमें कांग्रेस कमेटियाँ भी शामिल हैं ? हाँ, इस समय तो हैं ही। और मैं बताता हूँ कि क्यों हैं। अभी कांग्रेसके सामने एक बहुत कठिन कार्य पड़ा हुआ है; और छोटे-छोटे समूहोंसे सम्बद्ध आन्दोलनोंका संचालन करना उसके लिए सम्भव नहीं है। छोटे-छोटे समूहोंसे सम्बद्ध आन्दोलनोंका मतलब आप साम्प्रदायिक आन्दोलन न लगायें। यदि कांग्रेस ऐसे आन्दोलनोंमें सहायता देगी तो वह कहींकी नहीं रह जायेगी। कांग्रेसकी अपनी प्रतिष्ठा है, उसकी एक कीर्ति है, जिसे खोनेका भय उसे बना रहता है। इसलिए आप नौजवान लोग कांग्रेस अथवा अन्य सार्वजनिक संस्थाओंसे तत्काल यह भार अपने सिर लेनेकी अपेक्षा न रखें, यही बेहतर है । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५४४
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