५१२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय रहने चाहिए। और में चाहूँगा कि जरूरत हो तो एक कांग्रेसीकी हैसियतसे श्री कुल- न्दाई आन्दोलनकी सचाई और इसमें लगे लोगोंकी विश्वसनीयताका एक प्रमाण दें। यदि आप इस साधारण-सी परीक्षामें मुझे सन्तुष्ट नहीं कर सके तो आप आगे नहीं बढ़ सकते। आपने जमीन तो तैयार कर ही दी है। नीलकी मूर्तिको आज-न-कल हटना ही है। सफलता खुद हमारी शक्तिपर निर्भर होगी। आप अपनी गति धीमी कर दें तो उसमें कोई बुराई नहीं है । श्री एम० एस० सुब्रह्मण्य अय्यरको उत्तर देते हुए महात्माजीने कहा : जो तरीका अपनाया गया है, वह सत्याग्रहपूर्ण तरीका भी हो सकता है और हिंसापूर्ण तरीका भी। सब कुछ इस बातपर निर्भर है कि यह किस भावनासे किया जा रहा है। उस भावनाके अनुसार ही यह तय किया जा सकता है कि यह काम कैसा है। किसी निष्प्राण वस्तुको नुकसान पहुँचाना या उसे नष्ट करना सदा हिंसात्मक कार्यकी ही श्रेणीमें नहीं आता । श्री पावलार : तो क्या आपकी यह सलाह है कि आन्दोलन स्थगित कर दिया जाये ? हाँ, अगर आपमें सच्चा बल न हो। लेकिन, कृपया इसपर भली भाँति विचार करके कल मुझे बताइए कि आप क्या सोचते हैं । जब बुधवारको तीसरे पहर बातचीत फिर आरम्भ हुई तो एक स्वयंसेवकन उन लोगों की राय बताने के लिए एक बयान पढ़ा। पिछली रात और बुधवारकी सुबह उन लोगोंने महात्माजीकी सलाहको ध्यान में रखकर आपस में विचार-विमर्श किया था। इस बयानमें उसका निष्कर्ष बताया गया था । बयान निम्न प्रकार था : आपने कल हमें जो सलाह दी थी, उसपर हमने बहुत ध्यानपूर्वक विचार किया। रात श्री एस० सत्यमूर्ति से भी हमारी बातचीत हुई थी। इसके बाद हमने सारे मामलेपर आज पुनः विचार किया है। हम यह महसूस करते हैं कि परिस्थिति बहुत कठिन और पेचीदा है। इसलिए हम चाहेंगे, अब आप ही बताइए कि हमें क्या करना चाहिए। हम आपकी सलाहके मुताबिक चलेंगे। हम बहुत सोच-विचारकर कुछ निष्कर्षोपर पहुँचे हैं और हम उन्हें आपके विचारार्थं आपके सामने रखना चाहेंगे । हमें इस बातकी बहुत चिन्ता लगी हुई है कि आन्दोलन से जो उत्साह जगा है, उसे यों ही मन्द नहीं पड़ने देना चाहिए। हम यह स्वीकार करते हैं कि इस संघर्षको सफल बनानेके लिए यह जरूरी है कि हम पहले मूर्ति हटवानेके अन्य सारे तरीकोंको आजमाकर देख लें, जनता में उत्साह भरें और अपने-आपको ठीक ढंगसे संगठित करें। हमें ऐसी आशंका है कि यदि आन्दोलनके लिए ठीक संगठन कायम करने और मूर्ति को हटवानेके दूसरे सभी उपायोंको आजमाकर देख लेने के लिए आन्दोलनको स्थगित कर दिया गया और जनताके उत्साहको कायम रखनेके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई तो हो सकता है कि यह आन्दोलन प्रेरणाके अभावमें चुक जाये। इस- Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५४८
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