५२२ • सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय आनेके लिए मेहनत करती है और अपने पवित्र हाथोंसे कातकर मुझे सुन्दर सूत देती है । उस सूतका अपना एक इतिहास होता है। वह सूत इस योग्य होता है कि राजकुमारों और राजाओंके लिए वस्त्र बुने जा सकते हैं। मिलसे निकलनेवाले कपड़ेका ऐसा कोई इतिहास नहीं होता। मेरे लिए तो यह विषय अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है और में अपना लगभग सारा समय इसीके चिन्तन में लगाता हूँ, पर मुझे इसके लिए आपका और अधिक समय नहीं लेना चाहिए। यदि यह थैली आपके इस संकल्पका प्रतीक नहीं है कि आप अगर अभी खादी नहीं पहनते तो आगेसे निश्चय ही खादीके अतिरिक्त कोई वस्त्र धारण नहीं करेंगे, तो आपकी यह थैली मेरी सहायता करना तो दूर, मेरे मार्ग में बाधक बन जायेगी । आपके थैली भेंट करने और तालियाँ बजानेसे ही में इस भ्रम में पड़नेवाला नहीं हूँ कि आप खादीके सिद्धान्त में पूरी तरह विश्वास करते हैं। में चाहता हूँ कि आपकी करनी आपकी कथनीके अनुरूप हो। आप भारतकी शोभा हैं। में नहीं चाहता कि आपके बारेमें कोई कह सके कि आपने यह रकम मुझे झाँसा देनेके लिए दी थी, कि आप खादी नहीं पहनना चाहते और खादीपर आपका कोई विश्वास नहीं । तमिलनाडके एक प्रख्यात सपूत और मेरे मित्र द्वारा की गई भविष्यवाणीको सही मत होने दीजिए। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि मेरे मरनेपर मेरे दाह-संस्कारके लिए और लकड़ियाँ जमा करनेकी जरूरत नहीं पड़ेगी, उसका काम तो उन चरखोंकी लकड़ियोंसे ही चल जायेगा जिनको में आज लोगों में बाँट रहा हूँ । उनको चरखेपर कोई आस्था नहीं और उनका खयाल है कि जो भी चरखेकी बड़ाई करता है वह महज मेरी इज्जतके खयालसे करता है। उनकी यह हार्दिक राय है । यदि खादी आन्दोलन इतना ही निकम्मा निकला तो यह समूचे राष्ट्रके लिए एक भारी दुःखद घटना होगी और उस दुःखद घटनाको लाने में सीधे-सीधे आपका हाथ होगा और आप उस अपराधके सहभागी होंगे। वैसा करना समूचे राष्ट्र द्वारा आत्महत्या करना होगा । यदि चरखेपर आपकी जीवन्त आस्था नहीं तो उसे ठुकरा दीजिए। वह आपके प्रेमका कहीं सच्चा प्रदर्शन होगा। वैसा करके आप मेरी आँखें खोल देंगे और तब में भग्न स्वर में दुनियाके इस नक्कारखाने में यह चीखता हुआ अपनी राह चला जाऊँगा कि " आपने चरखेको ठुकराकर दरिद्रनारायणको ठुकरा दिया । " यदि में भ्रममें होऊँ, यदि आप ढोंग कर रहे हों तो इसका परिणाम मेरे और आपके लिए भी बहुत दुःखद, पतनकारी और अपमानजनक होगा। इसलिए में चाहता हूँ कि आप साफ- साफ सच बात कहकर उस सबसे मुझे और अपनेको भी बचाइए । यह तो हुई एक बात । लेकिन, आपने अपने मानपत्रमें और भी कई बातें कही हैं। आपने उसमें बाल-विवाह और बाल-विधवाओंका उल्लेख किया है। एक तमिल विद्वान्ने मुझे लिखा है कि में विद्यार्थियोंको बाल-विधवाओंकी समस्याके बारेमें बत- लाऊँ । उनका कहना है कि देशके अन्य भागोंकी अपेक्षा इस प्रान्त में बाल-विधवाओंकी हालत कहीं बदतर है । में उनके इस कथनकी सचाईको कसोटी नहीं कर पाया हूँ । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५५८
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