भाषण : रायपुरम्, मद्रास में ५२७ बुला ले। मरीजसे अपने चिकित्सकके साथ तन-मनसे सहयोग करनेकी अपेक्षा रखी जाती है । उसे चिकित्सककी हिदायतोंपर पूरी ईमानदारीके साथ चलना पड़ता है । हम मरीज हैं । हमने अपनी चिकित्सा के लिए डॉ० अन्सारीको बुलाया है। उन्होंने जिस कामका बीड़ा उठाया है, यदि हम उसमें उनके साथ सहयोग न करें, तो दोष उनका नहीं, हमारा ही होगा । और चूंकि सबसे अधिक भार मद्रासके कांग्रेस जनों और दक्षिण भारतसे ही सबसे अधिक संख्या में आनेवाले प्रतिनिधियोंके कंधोंपर पड़ेगा, इसलिए मुझे यह जानकर और भी खुशी हुई कि आप इस कांग्रेस अधिवेशनको सफल बनानेको कटिबद्ध हैं । आपने अपने कंधोंपर बहुत बड़ा और गम्भीर दायित्व ले लिया है । मुझे बतलाया गया है कि श्रीयुत एस० श्रीनिवास अय्यंगार यहाँके कांग्रेस- । मन्त्री के साथ रोज ही टेलीफोन द्वारा संपर्क बनाये रखते हैं । इससे पता चलता है कि उनको कांग्रेस के आगामी अधिवेशनकी कितनी चिन्ता है । अब यह मद्रास के लोगोंका ही काम है कि वे उनके श्रमका भार हलका करें और उनका काम आसान बनायें । हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि नेतागण ही हमारा सारा काम कर देंगे । अक्सर हमारे खिलाफ यह आरोप लगाया जाता है कि साधारण लोग अपनी पूरी शक्ति नहीं लगाते । में चाहता हूँ, मद्रास इस आरोपको गलत साबित कर दिखाये । आपने खादी और चरखेमें अपनी आस्था प्रकट की है । आपने अपने मानपत्रमें कहा है कि यदि आपको कपास भेजने और आपके काते हुए सूतको खरीदनेका प्रबन्ध कर दिया जाये तो आप खादीकी कताई-बुनाईका प्रबन्ध कर सकते हैं। आप यदि इस मामले में गम्भीर हैं तो आपको एक कदम और आगे जाना होगा । आपको अपनी एक समिति बनाकर अपने लिए कपासका खुद प्रबन्ध करना पड़ेगा । हर कतैयेको कताई में सिद्धहस्त बनने के लिए धुनना और अपनी पूनियाँ आप बनाना भी सीखना चाहिए। आपका लक्ष्य यही रहना चाहिए कि जितना सूत तैयार हो, उस सबको यहीं बुन लिया जाये । खादी तैयार करनेका यही सबसे अच्छा और सस्ता तरीका है । अगर आप खुद बुनाई नहीं कर सकते तो अखिल भारतीय चरखा संघको दे सकते हैं । उसको यदि बढ़िया किस्मका, मजबूत, इकसार बुना जाने लायक सूत मिले तो वह आपका सारा का सारा सूत खरीद सकता है । 1 मुझे मालूम है कि यह एक मजदूर - केन्द्र है। मैं अपने साथी मजदूरोंसे बस एक ही बात कहूँगा । जैसे भी हो, आपको शराबखोरी छोड़ देनी चाहिए और जुए तथा अन्य बुराइयोंसे भी हर तरह दूर रहना चाहिए। शराबखोरीका यह अभिशाप मजदूरोंके नैतिक और शारीरिक शक्तिको नष्ट कर रहा है। मजदूर भाई अगर कमर कस लें तो इस अभिशाप से छुटकारा पाना उनके लिए बहुत कठिन नहीं है । भारतीय मजदूर यदि अपनी सहायता आप करनेको तत्पर हो जायें तो उनका भविष्य सचमुच उज्ज्वल है । अपनी सहायता आप करनेका सबसे अच्छा तरीका है आत्मशुद्धि | मजदूरोंको यह भी याद रखना चाहिए कि आर्थिक दृष्टिसे हमारे देशके करोड़ों व्यक्ति उनसे भी बुरी स्थिति में हैं । यदि मजदूर लोग अपनेसे कहीं अधिक गरीबीमें रहनेवाले उन भाई-बहनोंका कुछ खयाल करें तो वे कमसे कम खादीको तो अपना ही लेंगे। मैं जानता हूँ कि यहाँ उपस्थित सभी भाई-बहनोंने इस थैलीके लिए Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५६३
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