पूर्ण मद्य-निषेध ५२९ माल करनेके लिए नाममात्रका आर्थिक सहारा भी दरकार नहीं । स्वेच्छासे जितना अधिक कष्ट सहन किया जायेगा, उतनी ही शीघ्रतासे और उतनी ही अधिक शुद्ध किस्मकी सफलता मिलेगी। इसलिए यदि सत्याग्रही लोग इन शर्तों और अपनी मर्यादाको भलीभाँति समझकर अपना काम ठीकसे करेंगे, और ये सभी शर्तें पूरी करते चलेंगे तो उन्हें विश्वास रखना चाहिए कि उनकी सफलता निश्चित है। यदि उनमें ऐसी योग्यताएँ न हों और यदि इन शर्तोंपर उनको विश्वास न हो तो उनको सत्या- ग्रहका मार्ग त्याग देना चाहिए। इन शर्तोंको पूरा करनेकी सामथ्यं न होनेके कारण यदि वे सत्याग्रहका खयाल छोड़ दें, तो उनके इस कार्यको में साहसपूर्ण मानूंगा । अपनी भूलें स्वीकार करने और अपनी सीमाएँ समझकर कदम पीछे हटा लेनेके लिए भी थोड़े साहसकी जरूरत पड़ती है । परन्तु यदि सत्याग्रही लोग मेरी बतलाई हुई इन शर्तोंको पूरा कर सकते हैं तो मैं उनको आशीर्वाद देता हूँ और प्रत्येक देशभक्तको उनको प्रोत्साहन और आशीर्वाद देना चाहिए। [ अंग्रेजीसे ] हिन्दू, ८-९-१९२७ ४२१. पूर्ण मद्य-निषेध आप यह बात समझ लीजिए कि शराब बनाने, तैयार करने और उसे अपने पास रखने आदिके बारेमें मौजूदा आबकारी अधिनियममें किये जानेवाले परिवर्तनोंका, काफी बड़ी हदतक, अनिवार्य परिणाम यह होगा कि लोगोंको परेशान होना पड़ेगा। आपको ऐसी परेशानीके लिए तैयार रहना चाहिए । मद्य-निषेधका यह एक अनिवार्य पहलू है । इसलिए मुझे यह भरोसा करके ही चलना है कि आप लोग इस काममें सहायता देनेमें किसी तरह की कोताही नहीं करेंगे। दुकानोंपर धरना देने, लोगोंको शराबकी बुराइयाँ समझाने और ऐसे ही अन्य कार्योंके लिए में आपकी सहायता नहीं लेना चाहता । जिस उद्देश्यके लिए में आपकी सहायता चाहता हूँ वह यह है कि अवैध शराब और उससे सम्बन्धित दूसरे अपराध बन्द हो सकें । यह उद्धरण मद्रासके लोक स्वास्थ्य एवं आबकारी मन्त्रीके भाषणके 'हिन्दू' द्वारा प्रकाशित विवरणसे लिया गया है । मन्त्री महोदयने एक और बात में भी जनतासे सहायता मांगी है; यह कि वे कर-वृद्धिको खुशी-खुशी स्वीकार कर लें। इसके बारेमें मैं इस समय इससे अधिक कुछ नहीं कहूँगा कि जनता जहाँ भी इस योग्य हो, उसे आवश्यकताका प्रमाण मिल जानेपर कर वृद्धिको स्वीकार कर लेना चाहिए। पूर्ण मद्य-निषेधका उद्देश्य पूरा करनेके लिए रुपये-पैसे के रूपमें जो भी कीमत चुकानी पड़े, थोड़ी ही होगी । लेकिन अभी तो में इस उद्धरणकी ही बात मन्त्री महोदयने मद्य-निषेधको गलत ढंगसे देखा है । करूँगा । मुझे तो लगता है कि मेरी राय में इस कामको आंशिक ३४-३४ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५६५
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