५३४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय और नगरके अधिकांश नागरिकोंके हृदयकी पवित्रता । मैं चाहता हूँ कि आप अपने से यह प्रश्न पूछें कि आप एक भी प्राणीको अस्पृश्य मानते हैं या नहीं । अस्पृश्यतामें विश्वास करनेवाले व्यक्तिकी पटरी पवित्रताके साथ बैठ ही नहीं सकती - दोनों परस्पर विरोधी हैं । आज मुझे इसी स्थानपर एक पत्र मिला है। उसमें कहा गया है कि मैं बस बाल-विधवाओंकी समस्याके बारेमें ही बोलूँ । मेरे लिए यह तो सम्भव नहीं कि में दूसरी बुराइयोंके बारेमें कुछ न कहकर सिर्फ इसी भारी बुराईकी चर्चा करूँ, लेकिन मुझे इस तथ्य की जानकारी है और इससे मेरा हृदय दुःखी भी है कि आपके यहाँ यह कुप्रथा मौजूद है। इतनी सारी कुमारी बाल-विधवाओंका होना हिन्दू धर्मकी प्रतिष्ठा नहीं बढ़ाता । यदि मेरा बस चलता तो मैं निश्चय ही हर माता-पिताको विवश कर देता कि वे अपने घरकी बाल-विधवाका पुनर्विवाह करायें। और फिर बाल-विधवा शब्द में भी एक अन्तर्विरोध है । विधवा तो वह वयस्क नारी ही हो सकती है जिसने अपने विवाहके लिए सहमति दी हो और विवाहित जीवन बिताया हो । बाल-विधवाओं के प्रश्नसे ही जुड़ा हुआ प्रश्न है बाल-विवाहोंका | सोलह वर्षसे कम अवस्थाकी बालिकाकी शादी कर देना अमानवीयता है । शास्त्रोंसे अपनी कामुकता और अपनी विलासी वृत्तिका समर्थन करने लायक अर्थ निकालना, इसी प्रकार उनकी व्याख्या करना, शास्त्रोंके प्रति हिंसा करना है । अब आप शायद कुछ समझ गये होंगे कि मैं पवित्रताका क्या अर्थ लगाता हूँ । आपको अपने नगरपर गर्व है । ऐसा गर्व क्षम्य है और स्वाभाविक भी। परन्तु आपको गर्व है, इसीलिए मुझे आशा है कि आप अपने इस नगरको मेरी गिनाई हुई सभी बुराइयोंसे मुक्त करनेके लिए कमर कस लेंगे और शीघ्र ही इसके लिए कुछ कारगर कदम उठायेंगे। आपने अपने मानपत्र में देश के दरिद्रनारायणके प्रति सहानुभूति रखनेका दावा किया है। यदि आपके हृदय में सचमुच ऐसी भावना है, तो आप तबतक चैन नहीं लेंगे जबतक कि आप पूर्ण मद्य-निषेध न करा लें । मुझे अभी एक पुर्जा दिया गया है। मुझसे कहा गया है कि मैं आपसे तिलक स्वराज्य-कोष और उस खद्दर कोषके बारेमें भी कुछ कहूँ जिसके लिए आपने मुझे आज थैलियाँ भेंट की हैं। तिलक स्वराज्य-कोषके बारेमें में आपको बतला दूं कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीने इसका परीक्षित लेखा प्रकाशित करके भारत- भरमें प्रचारित कर दिया है। लेकिन आज भी जो भाई जानना चाहें कि कुल कितना चन्दा जमा हुआ और किस प्रकार उसका वितरण किया गया, वे लेखेके विवरणकी एक प्रति महामन्त्रीसे प्राप्त कर सकते हैं। कुल निधिका वितरण इस प्रकार किया गया : उसका एक निश्चित प्रतिशत केन्द्रीय निधिके रूपमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीको दिया गया और शेष जिन प्रान्तोंसे राशियाँ जमा की गई थीं, उन्हींके पास रहने दिया गया। जहाँतक मेरी जानकारी है, सम्बन्धित प्रान्तोंमें से भी एक-दोको छोड़कर, बाकी सभीने उसके परीक्षित लेखे प्रकाशित कर दिये हैं। आपको यह भी Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५७०
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