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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५७१

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भाषण : कांजीवरम्म ५३५ बतला दूं कि सबसे अधिक राशियाँ हमने बम्बई प्रान्त में जमा की हैं और वे इसके लिए खास तौरपर नियुक्त किये गये कुछ न्यासियोंके पास रखी गई हैं। इस निधिमें कुछ बहुत बड़ी-बड़ी राशियाँ विशेष प्रयोजनोंके लिए दी गई थीं; और उनके व्ययका अधिकार उन विशेष राशियोंके दाताओंको सौंप दिया गया। मेरा अपना खयाल है कि तिलक स्वराज्य-कोषमें जितनी राशि जमा हुई है, उतनी बड़ी राशिवाले अन्य किसी भी कोषको इतने सुव्यवस्थित ढंगसे नहीं चलाया गया है । परन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि इन निधियोंमें कहीं भी कोई गबन नहीं हुआ । अन्य सभी मानव संस्थाओंको देखिए । कांग्रेस में भी हेर-फेर करनेवाले कार्यकर्त्ता रहे ही हैं। पर मैंने जाँच करके देखा है कि कांग्रेस में कुल मिलाकर हेराफेरी कम ही हुई है। में तिलक स्वराज्य-कोषकी बात कर रहा हूँ। इतनी सुव्यवस्था इसीलिए सम्भव हुई कि जिम्मेदार अधिकारियोंको नियुक्त करनेका खास खयाल रखा गया । इस निधिके कोषाध्यक्ष सेठ जमनालालजी स्वयं तो बहुत खरे हैं ही, साथ ही इतने सतर्क भी हैं कि उनके जैसा सतर्क कोषाध्यक्ष शायद संसार-भर में नहीं मिल सकता । और आप विश्वास कीजिए कि सेठ जमनालालजीके बारेमें में यह बात अपने निजी अनुभव के आधारपर ही कह रहा हूँ । अब खादी- कोषको लीजिए। इसके कोषाध्यक्ष भी सेठ जमनालालजी ही हैं, और मन्त्री शंकरलाल बैंकर हैं । इस निधिकी व्यवस्थाके लिए इन दोनों मित्रोंसे ज्यादा अच्छे व्यक्ति मिल ही नहीं सकते, मुझे इस बातका पूरा भरोसा है और उनके ऊपर बहुत ही चुनिन्दा लोगोंका एक बोर्ड है । बोर्डके सभी सदस्य चरखेके सन्देश में पूरी निष्ठा रखते हैं। इसकी राशियाँ अत्यन्त विश्वसनीय और साखवाले बैंकोंमें रखी जाती हैं। समय-समयपर पूरे देशके सभी प्रान्तोंके हिसाबकी जाँच की जाती है; और समय-समयपर प्रान्तों तथा केन्द्रोंके हिसाब-किताबकी भी लेखा-परीक्षा कराई जाती है । कोई भी व्यक्ति जब चाहे उस हिसाबको देख सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि वह स्वयं दाता ही हो। इस निधिके वितरणका तरीका यह रखा गया है कि जिन प्रान्तोंसे जितनी राशियाँ जमा की गई हैं, उनको उन प्रान्तोंके ही काममें लगाया जाये। परन्तु बोर्ड इस नियमका पालन आँख मूदकर नहीं करता। मिसालके तौरपर, बम्बई में हमने काफी बड़ी राशि जमा की है, लेकिन उसे बम्बईपर तो लगभग बिलकुल ही नहीं खर्च किया गया है। उड़ीसा में बहुत थोड़ा चन्दा जमा हो पाया है, फिर भी वहाँ खादीके कामकी व्यवस्थाके लिए काफी बड़ी रकम खर्च की गई है। इसी प्रकार तमिलनाडमें जितनी राशि अबतक इकट्ठी हुई, उससे कहीं ज्यादा उसपर खर्च की जा चुकी है। सबसे बड़ा नियम यह रखा गया है कि जहाँ भी कोई बड़ी विपत्ति आई हो और विपद्ग्रस्त क्षेत्रमें योग्य तथा ईमानदार कार्यकर्त्ताओंके जरिये अच्छी तरहसे काम कर सकनेकी सम्भावना हो, वहाँके लिए इस कोषका धन सदा सुलभ रहे | लोगोंको में बराबर इस बात के लिए आमन्त्रित करता रहा हूँ कि वे सार्वजनिक संस्थाओंके आमद-खर्चकी जाँच करें, गहरी जाँच करें और चूंकि में इस चीजको पसन्द Gandhi Heritage Portal