५३६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय करता हूँ, इसीलिए लिखकर पूछे गये इस प्रश्नका मैंने इतने विस्तारसे उत्तर दिया । मैं चाहता हूँ कि जनता सभी न्यास-निधियोंके हिसाब-किताब में अधिक रुचि ले तथा और ज्यादा सक्षम ढंगसे काम करे। में जितनी सावधानी बरत सकता हूँ उतनी सावधानी बरतनेके बावजूद में जानता हूँ और मुझे इस बातका दुख है कि मैं अकेले ही जनता द्वारा सौंपी गई इन अनेक निधियोंकी ऐसी व्यवस्था नहीं कर सकता कि कहीं किसी तरह की गड़बड़ीकी गुंजाइश न रहे। यह तो तभी सम्भव है जब जनता बराबर चौकस रहकर इस काम में मेरी सहायता करे। जनताकी सक्रिय और समझदारी-भरी सहायताके बिना इनकी व्यवस्थाको सर्वथा निर्दोष और पाक-साफ रखना किसी एक व्यक्तिकी शक्तिसे बाहर है। मेरे इस स्पष्टीकरणसे यदि और भी कुछ सवाल उठते हों तो में उनका सहर्ष उत्तर दूंगा । आप अभी ऐसे सवाल पूछ सकते हैं या चाहें तो बादमें पत्र लिखकर भी पूछ सकते हैं । [ अंग्रेजीसे!] हिन्दू, १०-९-१९२७ ४२४. भाषण : पेराम्बूरके आरुन्धतीयोंके समक्ष ८ सितम्बर, १९२७ महात्माजीने मानपत्रका उत्तर देते हुए, चर्मकार समाजके इन लोगोंसे आग्रह किया कि वे अपना धन्धा पशु वधसे प्राप्त चमड़ेसे न करें, बल्कि मरे हुए पशुओंकी खालका ही प्रयोग करें। महात्माजीने कहा कि मैंने खुद भी जूते बनाये हैं और आज भी काफी अच्छे जूते बना सकता हूँ। हाँ, मैं इतनी सुन्दर जोड़ी नहीं बना सकता जैसी कि आपने मुझे भेंट की है।' जूते बनानेका पेशा इज्जतका पेशा है, और इसके लिए किसीको शर्म खानेकी जरूरत नहीं । मैंने खुद भी साबरमतीमें चमड़ा पकानेका काम शुरू कराया है; वहाँ मरे हुए पशुओंकी खालें ही पकाई जाती हैं। इसके बाद महात्माजीने उनसे शराबखोरी छोड़नेका अनुरोध करते हुए कहा कि शराब आदमीको पशु बना देती है और वह परिवारका दुश्मन बन जाता है। आपको हर तरहकी बुराइयोंसे दूर रहना चाहिए। आप अगर अपनी रोजानाकी जिन्दगीके छोटे-छोटे काम करनेमें मेरी सलाहपर चलें तो समाजमें आपका दर्जा अपने- आप ऊँचा उठ जायेगा । अन्तमें महात्माजीने उनसे कहा कि आप यह हमेशा याद रखें कि भारतके देहातोंमें करोड़ों आदमी आपसे भी ज्यादा गरीब हैं। आपको उनके साथ हमदर्दी रखनी चाहिए और खद्दर पहनकर उनकी मदद करनी चाहिए। आपके लिए विदेशी १. गांधीजी और कस्तूरबाको मरे हुए पशुके चामसे बनी सैंडिलें भेंटमें दी गई थीं। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५७२
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