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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५८१

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४२८. भाषण : सेंट टॉमस माउंट, मद्रासमें बहनो और भाइयो, ९ सितम्बर, १९२७ आपके भेंट किये मानपत्रों और थैलीके लिए में आभारी हूँ। इन मानपत्रोंको सभा में पढ़नेका अपना अधिकार छोड़कर आपने ऐसे वक्त मेरे समयको बचत की है जब मेरे पास समयकी बड़ी तंगी है। इसके लिए भी में आपको धन्यवाद देता हूँ । मैं संघम्‌को उसके कल्याणकारी सार्वजनिक कार्योंके लिए बधाई देता हूँ। मैं देखता हूँ कि आप कुछ पाठशालाएँ चला रहे हैं, नगरकी सफाईका काम और यहाँतक कि अपने यहाँकी सड़कोंपर प्रकाशका प्रबन्ध करनेका कार्य भी कर रहे हैं। निस्सन्देह यह सार्वजनिक सेवाकी सही दिशा है, लेकिन मैं यह आशा भी करता कि आप यह सब काम सम्यक् रीति से कर रहे हैं। सफाईका काम ऐसा है कि अगर वह बिलकुल ठोस न हो तो कभी-कभी उससे लाभकी अपेक्षा हानि ही अधिक होती देखी गई है। सुव्यवस्थित ढंगसे किये गये कामोंसे ही स्थायी और लाभदायक सेवा हो सकती है। मुझे यह देखकर खुशी हुई कि आपने चरखेका काम भी हाथमें ले लिया है। आशा करता हूँ कि आपके यहाँ सभी चरखे नियमित रूपसे चलते रहेंगे । मैं यह भी आशा करता हूँ कि आप चरखोंको अच्छी हालत में रखेंगे। इस प्रदेशमें रहनेवाला प्रत्येक व्यक्ति खादी धारण न करे, ऐसा कोई कारण तो मेरी समझमें नहीं आता । यदि यहाँ कुछ ऐसे लोग भी हैं जो शराबखोरीकी लत के शिकार बने हुए हैं तो आशा है, आप उनको शराब छोड़नेके लिए प्रेरित करेंगे। जो लोग नहीं पीते, उनसे मेरा अनुरोध है कि वे अपने शराबी पड़ोसियोंके पास जायें और उनको बड़ी ही नरमीके साथ समझा-बुझाकर उन्हें इस गन्दी आदत से विमुख करें। आशा है कि आप एक ऐसा आन्दोलन खड़ा करेंगे जो देशमें पूर्ण मद्य-निषेध होनेतक लगातार चलता रहेगा । जैन भाइयोंकी ओरसे भेंट किया गया मानपत्र पाकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई । उनसे भी मैं यही कहूँगा कि आजकी परिस्थिति में अहिंसाके सिद्धान्तको केवल चरखेके द्वारा ही व्यापकतम रूपमें अमल में लाया जा सकता है। चरखेकी कल्पना देशके सुदूरतम गाँवों और ज्यादासे ज्यादा जरूरतमन्द लोगोंके लाभके लिए ही की गई है और यही इस प्रवृत्तिका उद्देश्य है । जिस अहिंसा, जिस प्रेमसे एक साथ करोड़ों क्षुधार्त्त लोगोंका कल्याण हो, उस अहिंसासे बड़ी अहिंसा और क्या हो सकती है, उस प्रेमसे श्रेष्ठ प्रेम और क्या हो सकता है ! मानपत्र | १. जैनियों, आम जनता और पोड़ जन उझियार संघम् (समाज सेवा संस्था ) द्वारा भेंट किये गये ३४-३५ Gandhi Heritage Portal