भाषण : वाई० एम० सी० ए०, कडलूरमें ५५१ प्रशंसा की थी, किन्तु 'यंग इंडिया' के पृष्ठोंसे, उन्हींके शब्दोंमें, ईश्वरकी जो बू आती है, उसपर उन्होंने बड़ी अरुचि प्रकट की थी। और आपको बता दूं कि ये अंग्रेज भाई कोई बुरे आदमी नहीं, बल्कि नैतिक दृष्टिसे बहुत अच्छे और दृढ़ व्यक्ति हैं । यही हाल उक्त भारतीय नौजवानका भी है। उससे मेरा सम्पर्क बराबर बना हुआ है और इसलिए मैं जानता हूँ कि अभी वह जीवित है। वह पूर्णताको प्राप्त करनेके लिए निरन्तर प्रयत्न कर रहा है। लेकिन, दोनों यही मानते हैं कि संसारमें पुरुषार्थ करनेके अलावा और किसी चीजका कोई महत्त्व ही नहीं है और जरूरत भी सिर्फ इसी चीजकी है, न इससे कमकी और न ज्यादाकी । इस सबके उत्तर में में सिर्फ इतना ही कह सकता हूँ कि में कमसे-कम पिछले ४० वर्षोंसे बहुत जागरूकतासे और सोच-समझकर लगातार प्रयत्न करता आया हूँ, किन्तु मेरा इतने दिनोंका अनुभव मुझे यही बताता है कि जहाँ अपनी ओरसे पुरुषार्थ करना नितान्त आवश्यक है, वहाँ अपने-आपमें वह कुछ नहीं है । ईश्वरकी जीवन्त कृपाके बिना वह सारा पुरुषार्थं धूल में मिल जाता है। इस बारे में अपने कई अन्तरंग मित्रोंके उदाहरण मैं जानता हूँ। उन्होंने पुरुषार्थ करके, जैसा कि उन्हें लगा, अपने-आपको अच्छी तरह गढ़ा, लेकिन उन्होंने पाया और में भी इस चीजको साफ देख रहा हूँ कि चूंकि उनके पुरुषार्थको इस जीवन्त कृपाका प्राणप्रद स्पर्श नहीं प्राप्त था, इसलिए वे क्षण-भर में एक जीती-जागती कब्र- जैसे बनकर रह गये। अभी उन्हें अपनी स्थितिका ठीक भान भी नहीं हो पाया था कि वे सूक्ष्म प्रलोभनोंके जाल में घिर गये और उन्होंने पाया कि वे उसको काट सकने में बिलकुल समर्थ नहीं हैं। इसलिए, चाहे आप मेरी भाषा समझें या न समझें, चाहे आप ईश्वर शब्दका महत्त्व जानें या न जानें, भारतके आप युवकों और युवतियोंको देनेके लिए वास्तव में मेरे पास दूसरा कोई सन्देश नहीं है । आपमें जो थोड़ी-बहुत बुद्धि है, उसके भ्रम में आप न पड़ें, बल्कि दुनियाके सभी कोनोंमें, तमाम विभिन्न क्षेत्रों में काम करनेवाले उन लोगोंके अनुभवोंको कुछ विश्वासकी दृष्टिसे देखें, जो एक स्वरसे कहते हैं कि ईश्वर है । मैं आपसे सच कहता हूँ, आपको भरोसा दिलाता हूँ कि यदि आप धैर्य से काम लेंगे और उस विश्वासका प्रयोग करेंगे तथा आपका मन चाहे कुछ कहे, आपकी बुद्धि आपके विश्वास के खिलाफ विद्रोह ही क्यों न करे, आपके आस-पासका वातावरण चाहे जैसा हो, फिर भी यदि आप यह मानेंगे कि आपके अन्दर ईश्वर विद्य मान है और आप अपने इस विश्वासपर दृढ़ रहेंगे तो आप देखेंगे कि किसी-न-किसी दिन यह आपके लिए एक जीवन्त सत्य बन जायेगा और यह आपका ऐसा सुरक्षाकवच होगा जो सभी तरह के प्रहारोंसे आपको बचाये रखेगा। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि ऐसा विश्वास आपको क्या कुछ दे सकता है तो आप मेरी बात सुनिए, मानिए । ईश्वर आप सबको, मैं जो कुछ कहता रहा हूँ, उसे किसी हदतक समझनेकी शक्ति दे । [ अंग्रेजीसे ] हिन्दू, १२-९-१९२७ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५८७
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