सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५९०

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

५५४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय चीजोंसे कभी सन्तुष्ट नहीं होता। वह जल्दीमें किये गये प्राण त्यागसे कभी सन्तुष्ट नहीं होता। वह तो शुद्धतम प्राणियोंकी ही बलि चाहता है, और इसलिए मुझे और आपको तो जितने दिनका जीवन मिला है उतने दिन हमें किसी-न-किसी तरह जीवनकी गाड़ीको खींचते ही चलना है। मैंने मद्रासमें अभी हाल ही में कहा था कि जब भी आप अपने विचार-विमर्शो में मुझे शामिल करना चाहेंगे या मेरी सलाह चाहेंगे, मुझे अपनी सेवामें प्रस्तुत पायेंगे। मेरे पास इस समस्याका कोई स्पष्ट हल नहीं है। में स्वीकार करता हूँ कि मुझे अभीतक यह भी मालूम नहीं है कि दोनों वर्गोंके बीच मतभेदके मुद्दे क्या हैं। मैंने कुछ अब्राह्मणोंसे, जो मुझसे नन्दी हिल्स में मिलने आये थे, इस विषय में पता चलानेकी कोशिश की, और उन्होंने मुझसे वादा किया कि वे मेरी यात्राके बीच मुझसे मिलेंगे और मतभेदके सारे मुद्दे मेरे सामने रखेंगे। मैं आपके सामने स्वीकार करता हूँ कि इस सवालपर ब्राह्मण पक्षका क्या कहना है, उसका भी मुझे कुछ पता नहीं है । ब्राह्मण बुद्धिमान तो हैं ही, अतः उन्हें यह भली भाँति पता है कि तमाम प्रश्नोंपर मेरे विचार क्या होंगे, और इसी- लिए में स्वीकार करता हूँ कि उन्होंने मुझे नहीं बताया कि मतभेद क्या हैं। जैसा कि आप जानते हैं, हालांकि में स्वयं एक अब्राह्मण हूँ, लेकिन मैं अब्राह्मणोंकी अपेक्षा ब्राह्मणोंके साथ और उनके बीच ज्यादा रहा हूँ और इसीलिए मेरे कुछ अब्राह्मण मित्र सन्देह करते हैं -- औद उनका सन्देह करना क्षम्य है कि मेरी धारणाएँ ब्राह्मण मित्रोंके विचारोंसे प्रभावित हैं। मेरे मन में कहीं यह सन्देह छिपा हुआ है कि मेरे अब्राह्मण मित्र मानते हैं कि मुझसे इस समस्याके समुचित हलकी आशा नहीं की जानी चाहिए । इसलिए मैं अपनेको ऐसी सुखद स्थिति में पाता हूँ जिसमें दोनों पक्षोंने मुझे अलग कर दिया है। यह स्थिति स्वास्थ्यकी मेरी वर्तमान दशाको देखते हुए मेरे लिए बहुत अनुकूल भी है। लेकिन इस सबके बावजूद में आपको विश्वास दिलाता हूँ कि में किसी भी वक्त किसी भी पक्षका निमंत्रण स्वीकार करनेके लिए सदैव तत्पर हूँ। और मैं आपको यह भी विश्वास दिलाता हूँ कि में खराब स्वास्थ्यका बहाना बनानेकी कोशिश नहीं करूँगा ।. लेकिन मेरे पास दोनों पक्षोंके लिए दो उत्कृष्ट प्रस्ताव हैं, जिन्हें में आपके सामने रख सकता हूँ । ब्राह्मणोंसे में कहूँगा : " यह देखते हुए कि आप ज्ञानके भण्डार और त्यागकी प्रतिमूर्ति हैं और आपने फकीरीका जीवन अपनाया है, में आपसे कहता हूँ कि अब्राह्मण लोग जो कुछ भी चाहते हैं वह उन्हें दे दीजिए, और वे आपके लिए जितना कुछ छोड़ दें, उतनेसे सन्तुष्ट रहिए।" लेकिन मैं जानता हूँ कि आधुनिक ब्राह्मण एक अब्राह्मण द्वारा की गई धर्मकी इस व्याख्याको फौरन अस्वीकार कर देगा । अब्राह्मणोंसे में कहता हूँ: " यह देखते हुए कि आपका संख्या-बल अधिक है, यह देखते हुए कि आपके पास धन-बल है, में पूछता हूँ कि आप किस बात की चिन्ता करते हैं ? अस्पृश्यताका आप जैसा विरोध कर रहे हैं, वह अवश्य करना चाहिए, लेकिन अपने बीच एक नई अस्पृश्यताको जन्म देनेका अपराध मत कीजिए। अपनी जल्दबाजी- में, अपने अन्धेपन में ब्राह्मणोंके प्रति अपने क्रोधमें आप उस पूरी संस्कृतिको अपने Gandhi Heritage Portal