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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५९७

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भाषण : चिदम्बरम् में आदि द्रविड़ोंके समक्ष ५६१ देख रहा हूँ, लेकिन आप इसके अपवाद हैं। मुझे आपका यह विचार पसन्द आया कि आप तमाम हिन्दू परम्पराओंको चाहे वे बुरी हों अथवा न हों, कुचल नहीं देना चाहते। लेकिन, चूँकि आपने विवेकसे काम लेनेका निश्चय किया है और चूंकि आप अच्छी चीजोंको नहीं, सिर्फ बुरी चीजोंको ही नष्ट करना चाहते हैं, इसलिए सिर्फ अपने गुणके बलपर अपनी न्याय्य स्थिति प्राप्त करनेके आपके संकल्पके लिए आपको बधाई देता हूँ । आपका यह दावा बिलकुल सही है कि आप इस प्राचीन देशके मूल निवासियोंके वंशज हैं और यदि यह देश अधिकारकी दृष्टिसे किसीका है तो निश्चय ही आपका है और सबसे पहले आपका है । इसलिए आपको हर तरह के लिहाजकी अपेक्षा रखनेका अधिकार है । ऐसा लगता है कि आपने अपने अन्दर सुधार करके शक्ति प्राप्त करनेके लिए कमर कस ली है। अब में आपका ध्यान एक-दो बातोंकी ओर दिलाना चाहूँगा । एक तो है शराबकी बुरी लत । लगभग हरएक आदि द्रविड़ उसका शिकार है ! इसलिए आपको आदि द्रविड़ समाजको इस बुराईसे मुक्त करने के लिए अपनी शक्ति- भर कोशिश करनी चाहिए। यदि मुझे गलत न मालूम हुआ हो तो कहूँगा कि आदि द्रविड़ लोग गो-मांस भी खाते हैं । हिन्दू धर्म बड़ा सहिष्णु धर्म है। लेकिन सहिष्णु होते हुए भी वह अपने अनुयायियोंको गो-मांस खानेकी अनुमति नहीं देता है। इसलिए जबतक एक-एक आदि द्रविड़ गोमांस खाना और गोवध बन्द न कर दे तबतक आपको आन्दोलन करते रहना चाहिए। आप इस मन्दिरको एक ही साथ भक्तिका स्थान, विद्याका मन्दिर और ऐसा केन्द्र बना दीजिए जिससे निकली शक्ति हर द्रविड़को, फिर हर हिन्दूको और अन्तमें हर भारतीयको अनुप्राणित करे। आपने अपने मानपत्रमें कहा है कि जबतक अस्पृश्यताके अभिशापको मिटाया नहीं जाता तबतक खादी अपने- आपमें सफल नहीं हो सकती । यह विचारोंकी एक उलझन है। जबतक इस देशके सभी लोग खादी नहीं पहनेंगे तबतक वास्तविक अस्पृश्यता कभी मिट नहीं सकती । में आपको बता दूँ कि आज भी भारत में ऐसे लोग हैं जो बहुत-से आदि द्रविड़ोंकी अपेक्षा अधिक गरीब और शोषित हैं। मैंने अपनी यात्रा के दौरान जिन आदि द्रविड़ोंको देखा है, उनमें से क्या बहुत से लोग भोजनके अभाव में दुःख नहीं सह रहे हैं ? लेकिन, मैं भारत के अनेक हिस्सों में ऐसे बहुत-से लोग आपको दिखा सकता हूँ जो आदि द्रविड़ नहीं कहे जाते किन्तु जिन्हें दिन में एक बार भी पेट भर खानेको नहीं मिलता । आप जिस अस्पृश्यताकी शिकायत कर रहे हैं, उसकी तुलनामें उन करोड़ों दम तोड़ते मानवोंकी अस्पृश्यताको दूर करना ज्यादा जरूरी है। उनकी अस्पृश्यता तो आज हम अस्पृश्यताकी जिस समस्या से घिरे हुए हैं, उससे कहीं अधिक गम्भीर किस्मकी है। इसलिए, आपके मानपत्रमें मैंने जब यह पढ़ा कि आप आदि द्रविड़ लड़कोंके लिए एक बुनाई- केन्द्र खोलना चाहते हैं तो मुझे बड़ी खुशी हुई। आपने मुझे इस बुनाई केन्द्रको सहायता देनेके लिए आमंत्रित किया है। यह आमन्त्रण मुझे पसन्द आया । मेरी सहायता चाहनेवाले हर बुनाई केन्द्रको जो शर्तें पूरी करनी पड़ती है, उन्हें यदि ३४-३६ Gandhi Heritage Portal