५६२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय आप पूरा करेंगे तो मैं आपकी सहायता अवश्य करूँगा । उनमें से पहली और सबसे महत्त्वपूर्ण शर्त तो यह है कि बुनाई केन्द्र में सिर्फ हाथकता सूत ही बुना जाये । यदि आप सचमुच कुछ करना चाहते हों तो आप मन्त्री श्री एस० रामनाथनसे सम्पर्क स्थापित कीजिए । देशके इस हिस्से में अखिल भारतीय चरखा संघ के प्रधान कर्त्ता-धर्त्ता वही हैं। आप उनके पास किसी भी समय पहुँच सकते हैं। आप देखेंगे कि वे अपनी शक्ति भर आपकी हर तरहसे सहायता करनेको तैयार हैं। मेरे और उनके जीवनका उद्देश्य ही यही है । चूंकि आप इस मन्दिरको श्रद्धा-भक्तिका केन्द्र बनाने जा रहे हैं, इसलिए मैं आपके ध्यान में दो बातें और लाना चाहूँगा । ये दोनों बातें अर्थात् संस्कृत और हिन्दीकी पढ़ाई हमारे बच्चोंके लिए जरूरी है। ये उनके जीवन में बड़ी सहायक हो सकती हैं । [ अंग्रेजीसे ] हिन्दू, १२-९-१९२७ ४३७. भाषण : चिदम्बरम्की सार्वजनिक सभामें अध्यक्ष महोदय और मित्रो, ११ सितम्बर, १९२७ मैं आपको इन सभी अभिनन्दनपत्रों और थैलियोंके लिए धन्यवाद देता हूँ । आपने इन सभी अभिनन्दनपत्रोंको न पढ़कर जो कृपा प्रदर्शित की है उसके लिए भी में आपको धन्यवाद देता हूँ, क्योंकि आप जानते हैं कि मुझे ७ बजेके फौरन बाद गाड़ी पकड़नी है और इसलिए मुझे अपनी बातें कम समय में ही कह देनी हैं । इसलिए सभी अभिनन्दनपत्रोंको न पढ़नेसे होनेवाली समय की बचत और भी ज्यादा सराहनीय है । में आपको बताता हूँ कि इस बात से मुझे तनिक भी सन्तोष नहीं है कि मुझे इतने कम समय के अन्दर आपके बीचसे चला जाना होगा । श्री राजगोपालाचारीने यंग इंडिया' में जो सुन्दर कहानी लिखी थी उसके जरिये आपकी ख्याति मेरे यहाँ आनेसे पहले ही फैल चुकी थी। आपके इस नगरकी ख्यातिसे में परिचित हूँ । उसी समय मैंने निश्चय कर लिया था कि चिदम्बरम् एक तीर्थस्थान है और मुझे वहाँकी यात्रा करनी है। मैंने कभी सबसे पहला सत्याग्रही होनेका दावा नहीं किया। मैंने तो उस सिद्धान्तको लगभग एक सर्वव्यापक पैमानेपर लागू करनेका ही दावा किया है। फिर भी अभी यह देखना और सिद्ध होना बाकी है कि यह सिद्धान्त एक ऐसा सिद्धान्त है जिसे लाखों लोग सभी तरहसे व्यवहृत कर सकते हैं । इसलिए मैं जानता कि मेरा यह प्रयोग अभी तक तैयारी की ही अवस्था में है । और इसलिए मैं सदैव नम्र रहता हूँ और मेरे पैर हमेशा धरतीपर जमे रहते हैं । विनम्रताकी ऐसी अवस्था में जब मेरे ध्यान में सत्याग्रहका कोई भी उदाहरण आता है तो में उससे उसी प्रकार चिपक जाता हूँ जिस प्रकार कि कोई बच्चा माँकी छातीसे चिपक जाता है । और Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५९८
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