४४८. पत्र : ओ० गै० विलार्डको स्थायी पता : साबरमती १४ सितम्बर, १९२७ प्रिय मित्र, आपके पत्र और कुमारी मेयोकी पुस्तकके लिए धन्यवाद । उनके एक मित्र मुझे उसकी एक प्रति पहले ही भेज चुके थे । अब मैंने पुस्तकको पढ़कर 'यंग इंडिया' के लिए उसकी किसी हदतक काफी विस्तृत समीक्षा भी लिख दी है। मैंने प्रकाशकोंसे कह दिया है कि 'यंग इंडिया' की एक प्रति निशान लगाकर आपको भेज दी जाये । इन बातोंको देखते हुए, मेरा खयाल है कि आप यह जरूरी नहीं मानेंगे कि आपके लिए कुछ खास लिखूं। लेकिन, अगर मेरी समीक्षा पढ़ने के बाद किसी मुद्देपर विस्तारसे लिखनेकी जरूरत समझें तो मुझे सूचित करें। आपकी समीक्षा मैंने काफी रुचिसे पढ़ी। हृदयसे आपका, मो० क० गांधी श्री ओसवाल्ड गैरिसन विलाई २०, विसे स्ट्रीट न्यूयॉर्क अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू० ९२२८ ) की फोटो - नकलसे । भाई पण्डितजी, ४४९. पत्र : ना० मो० खरेको बुधवार, भाद्र बदी ३ [ १४ सितम्बर, १९२७] प्रार्थनाके विषय में तुम्हारा पत्र मिला है। काका भी लिख चुके हैं, इसलिए मैं ज्यादा नहीं लिख रहा हूँ । प्रार्थनाका आदर्श तो एक ही है । परन्तु हम अपनी शक्ति के अनुसार चलें । अपने-आपको या जनताको धोखा न दें। यदि अधिकांश लोग चार बजे न आयें तो हम यह दावा छोड़ दें कि हम प्रार्थना चार बजे करते हैं और जो सबको अनुकूल हो वही समय रख लें। पर वैसा समय निर्धारित होनेके १. मायावरम्से १३ सितम्बर, १९२७ को इसी विषयपर खरेको एक पत्र महादेव देसाईने भी लिखा था। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/६१४
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