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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/६१९

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बातचीत: कुम्भकोणम्में पण्डितोंके साथ ५८३ अनन्त तपश्चर्याकी थी और जिन्होंने अपने विश्वासका आधार 'भगवद्गीता' की शिक्षाको बनाया था । अब मुझे चरखेके बारेमें कुछ कहना चाहिए। मुझे इस बातकी बड़ी खुशी है कि जहाँतक आपसे बन सकता है, आप इसमें सहायता दे रहे हैं। मेरे लिए यह प्रसन्नताका विषय है कि चरखेकी आवश्यकताके विषय में कोई मतभेद नहीं है । आपके बीच सौराष्ट्रके बुनकर लोग रहते हैं। आपमें खादी सेवाकी क्षमता असीम है। लेकिन इतना ही काफी नहीं है कि जब कभी में आपके पास आऊँ, आप मुझे कुछ पैसे दें; यही पर्याप्त नहीं है कि आपमें से कुछ लोग विशेष अवसरोंपर खादी पहनते हैं । यदि आप भारतके करोड़ों भूखे नंगे लोगोंके प्रति सचमुच अपनापन महसूस करते हों तो यह जरूरी है कि आप अपने सभी विदेशी वस्त्रोंको फेंककर खादीको अपना लें और इस तरह अपने भाइयोंको दुःख और गरीबी से बचायें । उसी तरह मद्यपानके अभिशापसे देशको मुक्त करना भी आपका कर्त्तव्य है । यदि हम मद्यपान करनेवाले अपने भाइयोंके हित-साधन में व्यक्तिगत रुचि लेना चाहें तो आपको पूर्ण मद्य-निषेधका आग्रह रखना चाहिए और में तो समझता हूँ कि वह दिन बहुत दूर नहीं है जब भारत में पूर्ण मद्य-निषेध हो जायेगा । जैसा कि सभी सभाओं में होता है, अभी स्वयंसेवक लोग आपके बीच जायेंगे और जो लोग कुछ देना चाहेंगे उनसे चन्दा इकट्ठा करेंगे । फिर, ऐसी सभाओं में, मेरी यात्रा के दौरान मुझे जो जेवरात और दूसरी कीमती चीजें मिलती हैं, उनकी नीलामी भी की जाती है। इस सभा में में एक अँगूठी नीलाम करना चाहता हूँ। अँगूठी इस समय मेरे पास है । मेरे मेजवान (श्री पंतुलु अय्यर) द्वारा भेंट की गई एक चाँदीकी तश्तरी भी थी, लेकिन दुर्भाग्यवश मैं उसे साथ नहीं ला पाया हूँ । [ अंग्रेजीसे ] हिन्दू, १५-९-१९२७ और १६-९-१९२७ ४५१. बातचीत : कुम्भकोणम्में पण्डितोंके साथ १४ सितम्बर, १९२७ पिछली रात यहाँके कई प्रमुख पण्डितोंने महात्मा गांधीसे मिलकर बातचीत की। ऐसा मालूम हुआ है कि अभी हालमें श्री गांधीने बाल-विधवाओं और उनके विवाहके बारेमें तथा अस्पृश्यताके सवालपर जो कुछ कहा था, उसपर पण्डितोंने आपत्ति की। उनका कहना था कि श्री गांधीका यह कथन गलत है कि हिन्दू-शास्त्रोंमें उन प्रथाओं का समर्थन कहीं भी नहीं किया गया है। वे प्रमाण देनको प्रस्तुत थे । श्री गांधीने उन्हें समझाया कि हिन्दू धर्मको रक्षाका सही मार्ग शास्त्रोंके छुट- पुट उद्धरणोंको प्रमाण- रूपमें पेश करना नहीं, बल्कि अपनी अन्तरात्माके निर्देशके अनुसार चलना है। उनके विचारसे ऐसी कोई भी चीज हिन्दू-शास्त्रोंके अनुसार धर्म Gandhi Heritage Portal