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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/६२१

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नाली-निरीक्षककी रिपोर्ट ५८५ लिखी गई हैं। इसलिए, इसे पढ़कर मेरे मन में जो धारणा बनी है, वह यह कि यह एक ऐसे नाली निरीक्षककी रिपोर्ट है जिसे, जिस देशके बारेमें उसे रिपोर्ट पेश करनी है, उस देशकी तमाम नालियोंको खोलकर उनकी जाँच करनेके लिए या फिर खोली गई नालियोंसे कितनी बदबू आती है, इसका सुन्दर और सजीव वर्णन तैयार करके पेश करनेके लिए भेजा गया हो । यदि कुमारी मेयोने यह बात साफ-साफ स्वीकार कर ली होती कि वे तो सिर्फ भारतकी नालियोंको खोलकर उनकी जाँच करनेके लिए ही यहाँ आई थीं, तो उनकी पुस्तकके खिलाफ शायद कोई शिकायत न रहती । लेकिन कुल मिलाकर देखें तो उनका कहना यही है कि "ये नालियाँ ही हिन्दुस्तान हैं", और यह बात वे कहती भी हैं एक प्रकारके विजय-गर्वके साथ। यह सच है कि अन्तिम परिच्छेद में सावधानी बरतनेके लिए कहा गया है, लेकिन यह भी वास्तव में, लेखिका द्वारा हर चीजकी आँख मूंदकर की गई निन्दाको पाठकोंकी नजरमें बिलकुल सच ठहरानेकी एक चाल है । मुझे तो लगता है कि जिसे भारतके बारेमें कुछ भी जानकारी है, वह इस अभागे देशकी जनताके विचार और जोवन- पद्धति के खिलाफ लगाये गये इन भयंकर आरोपोंको कभी स्वीकार नहीं कर सकता । पुस्तक में वर्णित तथ्य चाहे जितने सच्चे हों, लेकिन यह पुस्तक तो निस्सन्देह असत्यमय है | अगर में लन्दन की ऐसी तमाम गन्दी नालियोंको खोलकर उनसे निकलने- वाली गन्दगी और बदबूका पूरी तफसील के साथ वर्णन करूँ और कहूँ कि "यह देखिए लन्दन" तो मेरे द्वारा वर्णित तथ्योंको तो कोई चुनौती नहीं दे सकेगा, लेकिन मेरे निर्णयको सत्यका स्वांग ही माना जायेगा और यह बिलकुल उचित होगा । कुमारी मेयोकी पुस्तक इससे तनिक भी बेहतर, तनिक भी अलग ढंगकी रचना नहीं है । लेखिका कहती हैं कि भारत के बारेमें उन्होंने जो साहित्य पढ़ा, उससे उन्हें सन्तोष नहीं हुआ और इसलिए वे "लोगोंके दैनिक जीवनकी सामान्य बातोंके अवलोकनसे कोई ऐसा स्वेच्छाप्रेरित यात्री, जिसने राज्यकी ओरसे कोई आर्थिक सहायता न ली हो, जिसने अपने मन में पहले से ही कोई धारणा न बना रखी हो और जो बिलकुल निष्पक्ष हो, जो कुछ जान-समझ सकता है, वह सब जानने-समझने के लिए" भारत आई । उनकी पुस्तकको मैंने बहुत ध्यान से पढ़ा और मुझे खेदके साथ कहना पड़ता है कि उसको पढ़ने के बाद मैं उनके उक्त दावेको स्वीकार नहीं कर पा रहा हूँ । हो सकता है, उन्हें किसी राज्यकी ओरसे किसी तरही की आर्थिक सहायता प्राप्त न हुई हो । लेकिन, उनकी पुस्तकसे ऐसा तो कहीं नहीं लगता कि उन्होंने मन में पहले से कोई धारणा नहीं बना रखी थी और वे पूरी तरह निष्पक्ष थीं । जिनमें सरकारको दिल- चस्पी हो, सरकार द्वारा संरक्षित, ऐसे प्रकाशन हमारे लिए कोई नई चीज नहीं हैं; और इस विशेषणको " सरकारी सहायता प्राप्त" विशेषणके ही एक सुन्दर पर्यायके रूप में स्वीकार किया जाता है । हम अंग्रेजी हुकूमत के पहलेसे ही इस बातको जानते-समझते आये हैं कि शासन- कला (जिसे अंग्रेजोंने पूर्णता प्रदान की है) में ईमानदार और सम्माननीय कहे जानेवाले विद्वानोंकी सेवाएँ गुप्त रूपसे प्राप्त करनेका फन भी शामिल Gandhi Heritage Portal