नाली-निरीक्षककी रिपोर्ट ५८९ रहे हैं और शल्य चिकित्सक भी, भारतीय डाक्टर भी रहे हैं और यूरोपीय भी । फिर भी, जहाँतक अस्पतालों आदिके बारेमें मेरी रायका सम्बन्ध है, वह आज भी ज्यों- की-त्यों है। इसी प्रकार यद्यपि में मोटर गाड़ियों और रेलगाड़ियों में सवारी करता हूँ, फिर भी में उनका उतना ही प्रबल विरोधी हूँ जितना कि कभी था। मैं खुद इस शरीरको भी एक बुराई और अपनी उन्नति के मार्ग में बाधक मानता हूँ । लेकिन जब- तक यह चलता है तबतक इसका उपयोग करने में और खुद इसोके नाशके लिए अपनी समझ के मुताबिक इसका अच्छेसे अच्छा उपयोग करने की कोशिश करनेमें में कोई असंगति नहीं देखता । तथ्योंके तोड़-मरोड़का यह एक ऐसा उदाहरण हुआ जिसके बारेमें खुद मैं जानता हूँ । लेकिन, पुस्तक ऐसी घटनाओं और प्रसंगों के विवरणसे भरी पड़ी है जिसके बारे में कमसे कम एक औसत भारतीयको तो कोई जानकारी नहीं है । उदाहरण के लिए, उनका कहना है कि बम्बई में जय-जयकारकी तुमुल ध्वनिके बीच युवराजका जबरदस्त स्वागत किया गया था। फिर वे इस घटनाका वर्णन करती हैं। भारत के किसी भारतीयको तो इसकी कोई जानकारी नहीं है, और यदि यह बात हुई होती तो उसे इसकी जानकारी अवश्य होती। उनके अनुसार बम्बई में एक स्थानपर भीड़ युवराजकी मोटरगाड़ीके पास पहुँचने के लिए रेल-पेल करने लगी। वे कहती हैं कि : पुलिसने गाड़ीके चारों ओर घेरा बनानेकी कोशिश की, लेकिन उसकी कोशिश बेकार हुई । जय-जयकार करती हुई भीड़ गाड़ीके चारों ओर घिर आई और वह स्टेशनतक बहुत धीमी गति से गाड़ीके साथ-साथ चलती रही । वे आगे कहती हैं कि फिर स्टेशनपर जब गाड़ीके रवाना होने में तीन मिनटकी देर थी तब युवराजने आदेश दिया कि घेरे हटा लिये जायें और " भीड़" को अन्दर आने दिया जाये। इसके बाद जो कुछ हुआ, उसका वर्णन वे इन शब्दों में करती हैं : वह अपार भीड़ बाढ़से हहराती किसी नदीके समान उमड़ आई. जय- जयकार करती, हँसती और रोती हुई; और जब गाड़ी चल पड़ी तो जिस डिब्बेमें युवराज बैठे थे उसके साथ-साथ वह तबतक दौड़ती रही जबतक कि गाड़ीकी गति तेज हो जानेके कारण उसके लिए साथ दौड़ सकना असम्भव न हो गया । कुमारी मेयोके अनुसार यह सब २२ नवम्बर, १९२१ की शामको घटित हुआ जब कि दंगेकी बुझती हुई चिनगारियोंमें गर्मी शेष थी । यह रोमानी परिच्छेद, जिसका शीर्षक है " प्रकाशकी इन किरणोंको देखिए", इस तरहके विवरणोंसे भरा पड़ा है । उन्नीसवें परिच्छेदमें विभिन्न लोगों द्वारा ब्रिटिश सरकारकी उपलब्धियोंकी प्रशंसामें कही गई बातोंका संग्रह किया गया है, हालांकि इनमें से लगभग हर बातकी सत्यताको ऐसे अंग्रेज और भारतीय लोगोंने, जिनकी ईमानदारीमें सन्देह करनेकी कोई गुंजाइश नहीं है, अनेक बार सफलतापूर्वक चुनौती दी है। सत्रहवें परिच्छेद में दिखाया गया है कि हम “दुनियाके लिए एक खतरा हैं ।" यदि कुमारी मेयोके प्रयत्नों से Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/६२५
दिखावट