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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/६३४

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५९८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय सकता है, बाल-वैधव्य और बाल-विवाह, और इसी तरह न जाने कितने भयंकर प्राचीन विश्वासों और मूढ़तापूर्ण रीति-रिवाजोंको प्राचीन परम्पराओंकी श्रेणीमें रखा जा सकता है। लेकिन, मेरा बस चले तो मैं तुरन्त उनका अस्तित्व समाप्त कर दूं । इसलिए जब मैं प्राचीन परम्पराओंकी रक्षाकी बात करता हूँ तो अब आप समझ गये होंगे कि मेरा मतलब क्या होता है । और चूंकि में 'भगवद्गीता' म भी उसी ईश्वरको देखता हूँ जिसे 'बाइबिल' और 'कुरान' में देखता हूँ, इसलिए में हिन्दू लड़कोंसे कहता हूँ कि वे 'भगवद्गीता' से अधिक प्रेरणा ग्रहण करेंगे, क्योंकि उनके मनका मेल दूसरी किसी भी पुस्तककी अपेक्षा 'गीता' से ज्यादा बैठेगा । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २२-९-१९२७ ४५६. भाषण : मन्नारगुडिको सार्वजनिक सभामें अध्यक्ष महोदय और भाइयो, १५ सितम्बर, १९२७ इन अनेक मानपत्रों और दरिद्रनारायणके लिए भेंट की गई थैलियोंके लिए आपको धन्यवाद दे रहा हूँ । ताल्लुका बोर्डने मुझे अपने मानपत्रके हिन्दी अनुवादकी एक प्रति पहले ही दे दी, इसके लिए मैं उसे बधाई देता हूँ। में उस दिनकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ जब मैं हर जगह हिन्दी में बोलूं और लोग मेरी बात समझ सकें । यह भारतकी सम्पर्क भाषा है या होनी चाहिए। अभी तो, जैसा आप जानते हैं, उत्तर और दक्षिणके बीच लगभग एक दीवार-सी खड़ी है। दक्षिणसे उत्तरको जानेवाले जनसेवी कार्यकर्त्ताओंको जब लोगोंके सामने अपनी बात कहनी होती है तो वे बड़ी मुश्किल में पड़ जाते हैं। मैं यह नहीं कहता कि हिन्दीको तमाम प्रादेशिक भाषाओंका स्थान ले लेना चाहिए, लेकिन यह अवश्य कहता हूँ कि सभी जनसेवी कार्यकर्त्ताओंको, लोकमतको नेतृत्व देनेवाले सभी लोगोंको, वे जहाँ भी जायें, अपनी बात हिन्दीमें कह सकनी चाहिए। आप सभी जानते हैं कि उत्तरकी समितिने ६-७ साल पूर्व दक्षिणमें हिन्दी के प्रचारका काम शुरू किया। जो लोग हिन्दी सीखनेके इच्छुक हैं उन्हें हिन्दी सिखानेके लिए इस समितिने लगभग एक लाख रुपया खर्च किया है। मद्रासके केन्द्रीय कार्यालयको प्रयाग-स्थित मुख्य कार्यालयने अपना काम स्वतन्त्र रूपसे चलानेका अधिकार दे रखा है और अब यह बात दक्षिणमें लोकमतको नेतृत्व देनेवाले लोगोंके हाथोंमें है कि वे समितिके कार्य-व्यापारका विस्तार करें और इसे आत्मनिर्भर बनायें । आपने अपने सभी मानपत्रोंमें भारत-भरमें किये जा रहे चरखा और खादी- सम्बन्धी कार्यका अनुमोदन किया है। में बहुत पहले से जानता हूँ कि मन्नारगुडि अपने बुनाईके कामके लिए प्रसिद्ध था और मैं यही आशा करूँगा कि निकट भविष्य में मन्नारगुडिके सभी बुनकर हाथकते सूत से बुनाई करेंगे। लेकिन, जबतक आप गाँवों में जाकर उन सभी लोगोंको, जिनके पास हर साल काफी अवकाश रहता है, काम नहीं देंगे तबतक बुनकरोंको अच्छा कता हुआ काफी सूत नहीं मिल सकता । आज Gandhi Heritage Portal