६०० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय इस सम्बन्ध में मुझे बाल-विधवाओंके प्रश्नको चर्चा अवश्य करनी चाहिए। हमें अपनी अबोध बालिकाओंको सीधा-सादा न्याय देना है और इसमें बहस-मुबाहसा करनेकी कोई जरूरत नहीं है । हममें इतना साहस तो होना ही चाहिए कि हम ऐसे हर बाल-विवाहको रद्द मानें। जबतक हम एक भी बाल विधवाको ठीक उम्रकी होनेपर अविवाहित रहने देते हैं तबतक हम मानवताके प्रति अपना कर्त्तव्य पूरा करनेमें चूक कर रहे हैं। इस सवालसे स्वभावतः बाल-विवाहका प्रश्न उठता है । कम पढ़े-लिखे लोगों से बातचीत करनेपर मुझे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि यद्यपि वे स्वीकार करते हैं कि ये चीजें बुरी हैं, फिर भी उनमें इन बुराइयोंसे छुटकारा पाने की कोई प्रवृत्ति नहीं है यहाँतक कि सामाजिक बहिष्कारके भयसे भी वे इसे छोड़नेको तैयार नहीं हैं। और आप देखेंगे कि आप ज्यों ही भारतके इन करोड़ों मेहनतकश लोगोंके बारेमें सोचना शुरू करेंगे और इनके साथ एक जीवन्त सम्बन्ध कायम कर लेंगे, आपका ध्यान बरबस देशके शराबखोरोंकी ओर चला जायेगा । .. - हम मध्यवर्गीय लोग इस अभिशापसे ग्रस्त लोगोंकी ओरसे उदासीन रहे हैं। मेरी तुच्छ सम्मति में, इन लोगोंके बीच जाकर उन्हें इस कुमार्ग से विमुख करना हमारा कर्त्तव्य है । लेकिन म जानता हूँ कि जबतक सब जगह ताड़ीकी दुकानें कायम हैं तबतक हमारे उन भाइयोंके लिए अपने मनको बसमें रखना कितना कठिन है । इस- लिए, पूर्ण मद्य-निषेध कराना हमारा अनिवार्य कर्त्तव्य है । जैसा कि इस तरहकी सभी सभाओं के अन्त में होता है, स्वयंसेवक लोग झोलियाँ लेकर आपके बीच जायेंगे ताकि जिन लोगोंने इन थैलियोंमें पहले भी कुछ न डाला हो, वे अब कुछ दे सकें। खुशीसे दिया गया एक पैसा भी स्वागतके योग्य है । यह विशुद्ध रूप से देशके निर्धनतम लोगोंकी सेवा करनेका मामला है। जो भी पुरुष और स्त्रियाँ कुछ देना चाहती हैं, उन्हें इस उद्देश्य के लिए दान देना अपना कर्त्तव्य और सौभाग्य समझना चाहिए। आपको बता दूं कि मायावरम् में एक प्रश्नके उत्तर में मैंने उस संगठनकी पूरी कार्य-प्रणाली समझाई थी, जिसके आधीन चरखेका काम चलाया जाता है। मैं चाहता हूँ कि आप इस संगठनकी प्रगति और व्यवस्था में सक्रिय रुचि लें और इसके पास जो पैसा आता है, वह कैसे खर्च किया जाता है, इसे अच्छी तरह जानें-समझें । लेकिन, में आपको यह बता दूं कि आज भारत-भर में पन्द्रह सौ गाँवोंमें पचास हजारसे अधिक बहनें इससे लाभ उठा रही हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दक्षिणकी बहनोंकी है। करीब २० लाख रुपये इस संगठनको चलानेमें लगाये जा चुके हैं और लगभग १,५०० कार्यकर्त्ता इसे चला रहे हैं। इसमें जिन लोगोंकी रुचि है, उन सबको में इसकी विभिन्न शाखाओंकी कार्य-प्रणालीका अध्ययन करनेको आमन्त्रित करता हूँ । इसी संगठनके लिए मैं इस प्रदेशके सभी लोगोंसे चन्दा देनेका अनुरोध कर रहा हूँ । [ अंग्रेजीसे ] हिन्दू, १७-९-१९२७ १. देखिए " भाषण: मायावरम् में", १३-९-१९२७ । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/६३६
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