९२ सम्पूर्ण गांवी वाङ्मय इसी जातिके एक अन्य व्यक्तिका लिखा एक और भी पत्र अभी मेरे सामने है। ऐसा जान पड़ता है कि जो लोग पत्नियाँ खरीदना चाहते हैं, वे गोआ जाते हैं, क्योंकि वहाँ ऐसे गरीब सारस्वत ब्राह्मण मिल जाते हैं जो पैसेके लोभमें अपनी लड़- कियोंको ऐसे बूढ़े लोगोंके हाथों बेच देनेमें शर्म नहीं खाते जो उन लड़कियोंके पिता या पितामहकी उम्र के होते हैं। इस प्रकार यह जाति दोहरा पाप करती है। कोई भी व्यक्ति सबसे ऊँचा दाम देकर अपनी लड़कीके लिए किसी शिक्षित नौजवानको खरीद सकता है और जरूरतमन्द माता-पितासे बूढेसे-बूढ़ा व्यक्ति भी (जो कभी-कभी शिक्षित भी होते हैं ) अधिकसे-अधिक पैसा देकर उनकी लड़की खरीद सकता है। यदि सारस्वत ब्राह्मण लोग अपने मनको सन्तोष देना चाहें और यदि वे इस सुधारको टालना चाहें तो एक चीज है जिससे वे अपने मनको सन्तोष भी दे सकते हैं और जिसकी आड़ में वे इस सुधारके प्रयत्नको टाल भी सकते हैं। वह यह है कि दूसरी बहुत-सी जातियाँ भी इस बुराईसे मुक्त नहीं हैं। फर्क होगा तो सिर्फ मात्राका । लेकिन यदि सारस्वत ब्राह्मण लोग इस सुधारमें आगे बढ़कर रास्ता दिखाना चाहते हैं। तो " आप भी तो मेरे ही जैसे हैं" के झूठे बहानेकी आड़ नहीं लेंगे और अब चूंकि इस बुराईका पर्दाफाश हो चुका है, इसलिए वे इस दोहरे पापसे अपनेको मुक्त करनेका प्रयत्न शुरू कर देंगे। [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ६-१०-१९२७ ६७. पत्र : मीराबहनको ६ अक्टूबर, १९२७ चि० मीरा, यह तूतीकोरिनसे लिख रहा हूँ। मैं उम्मीद कर रहा था कि यहाँ तुम्हारा कोई पत्र जरूर आयेगा। मुझे आश्रमसे खबर मिली है कि तुम वहाँ सकुशल पहुँच गई हो। परमात्मा तुम्हारा कल्याण करे। सप्रेम, मीराबहन सत्याग्रहाश्रम बापू सावरमती अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू ० ५२८४ ) से । सौजन्य : मीराबहन करती है। कुछ महीने पहले बम्बईके एक सज्जनने, जो एक उच्च सरकारी अधिकारी हैं, दहेजमें २०,००० रुपये लिये । यह सचमुच बड़े दुःखकी बात है कि ऊँची शिक्षा पानेवाले लोग इतने गिरते जा रहे हैं। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 35.pdf/१२०
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