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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 35.pdf/६१५

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सांकेतिका
डोक, जोजेफ, ४१०
ड्रमण्ड, डा॰ हेनरी, ४६१

तकली, –विद्यार्थियोंके लिए, १३८, १३९, २००, २०४
तकली स्पिनिंग, २६७
तमिल, –भाषाको तमिलनाडुमें प्राथमिकता, ९४; –सीखने के लिए गांधीजीका प्रयास, ९४
तम्बीराजा, २७४
तारिणी, १८५
तिरुकुरल, –के अध्ययनकी गांधीजीकी इच्छा, ९४
तिलक, लोकमान्य बालगंगाधर, ९३, २१८, ३९९, ४०१
तीर्थयात्रा, –और धर्म, ४३५
तुलजापुरकर, सुभद्रा, ४२५
तुलसीदास, १७४, ४६७
तेहलरमानी, २३४
तैयबजी, अब्बास, ३५२, ४६६
तैयबजी, रेहाना, ३५२, ४०७
त्यागी, चन्द, २९४
त्रावणकोर, –में अस्पृश्यता निवारण, १०१-६, ११७, ११९-२१; –में खादीका प्रयोग, १२३-२४; –में नशाबन्दी, १२३
त्रिनेत्र (रुद्र), ३९९
त्रिवेन्द्रम एक्सप्रेस, १०७

थडानी, २२४

दक्षिण आफ्रिका, –के अनुभव, ३०१-३; –में भारतीयोंके लिए किया गया काम, ३४५; –में सत्याग्रह, १

दक्षिण आफ्रिकाके सत्याग्रहका इतिहास, ४९१ पा॰ टि॰
दमयन्ती (वैदर्भी), ८९, ३६१, ४८६
दयानन्द, स्वामी, १६, ४३४
दयालजी, १६९ पा॰ टि॰, १७२
दलित वर्ग, –और हिन्दू-धर्म तथा उनकी सामाजिक स्वतन्त्रता, १४५-४७; देखिए अस्पृश्य भी
दलित वर्ग विकास समिति, ४३१ पा॰ टि॰
दलीपसिंह, जस्टिस, १६, १७
दवाएँ, और उनकी दासता, ४७६ –देशी और मौलिक अनुसन्धान, ४९९
दशरथ, ४६७
दस्तकारी, –का पुनरुद्धार, ३१६-७
दहेज, ३६१
दातार, एस॰ जी॰, ४२८
दादू, ३८० पा॰ टि॰
दास, देशबन्धु चि॰ रं॰, ३९९
दास, रामेश्वर, ४०५
दासगुप्त, सतीशचन्द्र, ५, ४२, १८४, २९५, ४५९, ४६९, ४८४, ५००, ५१५, ५३३
दासगुप्त, हेमप्रभादेवी, ४३, २९५, ४५९, ४८४, ५०२, ५२२
दीवान, –कोचीनके, १३२; –त्रावणकोरके, १०५
दूध, –सम्भरणका काम नगरपालिका करे और गरीबसे गरीब व्यक्तिके लिए सुलभ करे, २४७
दूनीचन्द, लाला, ४४०, ४४१, ५१५
देवदासी प्रथा, का अन्त, ३८, ५५, १३५, १४२-३, १५४, १५९, ३८९; –से प्राचीन संस्कृतिको कोई लाभ नहीं, ३३९-४०
देवीचन्द, ४१९