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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 35.pdf/६२१

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सांकेतिका
रिक शुद्धतामें, २९, ४०, ४६; –का सौन्दर्य उनके आभूषणोंमें नहीं, ६५, ८०-८१, १३६, १५५, २०१, २९८-९९; –की उन्नति, ३०७; –की खादी पोशाकोंकी किस्में, ५२३-२५; –की पुरुषोंसे समानता, २९८-९९; –की सहिष्णुता, ३८८; –की शादीकी उम्र, ८१, ५१९; –के वस्त्रोंमें सादगीकी जरूरत, २९४; –को आदरकी दृष्टिसे देखना, २१७, को आभूषण त्याग करनेकी सलाह, ४११, –खादी कोषके निमित्त ११, ८०, ८१; –से कताई करनेका आग्रह, ११, ४६-७, ६६-७, १५३; –से खादी पहननेका अनुरोध, ११, २८-९, ४०, ४६-७, ६५-६, ८०-१, १३२-३३, ३३७, ३४७, ३७४-५; –से देवदासी प्रथा समाप्त करने में मददकी अपेक्षा, १५४
महेन्द्र, २९८, ३३१
मांस भक्षण, ३९५-६
माई गांधी, ३६९
माणेकलाल, ४५९
मातृभाषा, १९९; देखिए प्रान्तीय भाषाएँ भी
माधवन, टी॰ के॰, १२१
मार्तण्ड, ६
मालवीय, मदनमोहन, ७३, ३९९, ४०१, ४३३, ४३६, ४४३, ४५२, ४५८, ४६५, ५००, ५०१
मालिक, –कर्मचारियोंके न्यासियोंके रूपमें, २८६
मिट्टीका इलाज, ४६२, ४६६-७
मिलका कपड़ा, –देशी बनाम विदेशी, ५०१, ५१२-१३
मिल मालिक, और हाथ कताई, ६१, ६२ मेहर, तुलसी, २२६

मिश्र, राजेन्द्रप्रसाद, ५१५
मीठूबहन, देखिए पेटिट, मीठूबहन मीराबहन, ७, ४८, ४९, ५९, ६३, ६९, ७३, ७६, ७८, ८७, ९२, १०१२, १११, १६०, १७६, १८३, २११, २२२, २२३, २२५, २४३, २९४, ३५१, ३९४, ३९५, ४३५, ५०४
मुंजे, डा॰ बी॰ एस॰, ३९९, ५१६
मुखर्जी, घनगोपाल, २४२
मुत्तुलक्ष्मी, डा॰, १५४, १६०
मुसलमान, १६३, २०८, ३०९, ३३८, ३४०, ३४४, ३४७, ३६८, ४३६, ४५०, ४५१, ४७९, ५०५; –और उनके लिए पृथक् विश्वविद्यालय, ५१६; –और खादी, १३२; –और गांधीजी, ३००; –और राष्ट्र-हित, १०; –और हिन्दू, ७२-३, २१४-५, २३०, ३४४-५, ४०१, ४५३; देखिए हिन्दू-मुस्लिम एकता भी
मुसोलिनी, २१०
मुहम्मद, पैगम्बर, २५८, २५९, ३३९-४१
मुहम्मद अली, ५०, २१५ पा॰ टि॰; देखिए अलीबन्धु भी
मूर्ति, गोपराजू सत्यनारायण, ४०६
मृत्युंजय, १७४, ४४७, ५२०
मृत्यु, –पर शोक नहीं, २९५, ४९३
मेढ, १५, १८, २४, ११८
मेनन, टी॰ के॰ रामुन्नी, ४२१
मेनन, राघव, १४५
मेनन, वी॰ के॰ शंकर, ४३१ पा॰ टि॰, ४९८
मेयो, कैथरीन, २४२ पा॰ टि॰, ४५७
मेहता, डा॰ जीवराज, १९, ४०३
मेहता, नरसिंह, २२८