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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१६१

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प्रिय मलकानी, १४०. पत्र : ना० २० मलकानीको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २० मार्च, १९२८ तुम्हारा पत्र मिला । तुम्हें मेरा तार' अवश्य मिला होगा। मैं अपने आपको इस बात के लिए राजी नहीं कर पाता कि तुम सिर्फ अपने गुजारेके लिए कालेजमें रहो। बाढ़ सहायता कोषसे तुम्हें निर्वाहके लिए कुछ दिया जाये, इसमें मुझे कोई दोष नहीं दिखाई देता । इस सम्बन्ध में मैं ठक्कर बापासे लिखा-पढ़ी कर रहा हूँ और अगर तुम्हारी वर्तमान स्थितिमें किसी प्रकारका कोई फेर-फार किये बिना ऐसा किया जा सके, तो अवश्य किया जाना चाहिए। तुम्हें रुपया चाहे मुझसे मिले अथवा बाढ़ सहायता कोषसे, होगा वह सार्वजनिक कोष में से ही । " अवैतनिक " शब्दको जिस अर्थ में हम प्रयुक्त करते हैं उस प्रकारकी अवैतनिक सेवाके बदले में कुछ लेनेमें शर्म नहीं करनी चाहिए। मजदूरको अपनी मजदूरी मिलनी ही चाहिए और जब सेवक अपनी मजदूरीसे ज्यादा कुछ नहीं लेता तब उसकी सारी सेवाएँ अवैतनिक ही हैं । भारतके अन्य हिस्सों में तुम्हारी सेवाओंके लिए सामान्यसे अधिक देना होगा; यह दुर्भाग्यकी बात है, लेकिन अपरिहार्य है । यदि तुम्हें सुविधापूर्वक बाढ़ कोषसे मानदेय न दिया जा सके तो उसके भुगतानकी जिम्मेदारी मेरी होगी। परन्तु मैं चाहता हूँ कि तुम मुझे बताओ कि तुम्हें कितनेकी आवश्यकता होगी । ठक्कर बापाने मुझे बताया है कि वे भी आश्रमसे तुम्हारे पास एक अच्छा कार्यकर्त्ता भेजनेवाले हैं तथा एक वे तुम्हारे पास पहले ही छोड़ आये थे । पर यदि तुम्हारे मनमें किसी व्यक्ति विशेषका नाम हो, तो उसे बताने में कृपया संकोच मत करना; मैं देखूंगा कि क्या वह तुम्हें दिया जा सकता है । हृदयसे तुम्हारा बापू अंग्रेजी (जी० एन० ८८४) की फोटो नकलसे । ३६-९ १. देखिए "तार : ना० २० मलकानोको ", १९-३-१९२८ । Gandhi Heritage Portal