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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१६५

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पत्र : जाकिर हुसैनसे १३३ यन्त्र लेते ही आये थे उनका मेरी जाँच कर लेना स्वाभाविक ही था । जाँच करने पर उन्होंने मेरा स्वास्थ्य संतोषजनक पाया; सवेरे हृदयका आकुंचन १४९ तथा स्फुरण ९२ था तथा शामको आकुंचन १५२ और स्फुरण ९८ । डा० वि० च० राय कलकत्ता अंग्रेजी (एस० एन० १३१२०) की फोटो नकल से । १४६. पत्र : जाकिर हुसैनको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती प्रिय जाकिर, २० मार्च, १९२८ आपका पत्र और लॉर्ड इविनके पत्रकी प्रति मिली। ज्यादातर लॉर्ड इविनके पत्रकी वजहसे मेरे मसविदेके' अनुरूप ही पत्र भेजना दुगुना लाभप्रद होगा । निश्चय ही कुछ आवश्यक रद्दोबदल करने होंगे। आशा है डा० अन्सारी अन्तमें जो पत्र भेजेंगे, उसकी एक प्रति आप मुझे भेज देंगे । मुझे नहीं मालूम कि देवदासने आपका ध्यान क्वार्टरोंकी सफाई व्यवस्थाकी उचित देखभाल किये जानेकी आवश्यकताकी ओर दिलाया है या नहीं। मैं चाहूँगा आप देवदासको कहें कि उसने जो कमियाँ देखी हैं, उन्हें बता दे । आशा है कि आप निमन्त्रण-पत्र भेजने और आश्रममें हम दोनोंने चर्चा करनेके बाद जो कार्यक्रम तय किया था उसके अनुसार कार्य करनेमें देरी नहीं करेंगे । हृदयसे आपका, अंग्रेजी (एस० एन० १३११९) की फोटो नकलसे । १. १७ मार्चके अपने पत्रके साथ जाकिर हुसैनने डॉ० अन्सारीको लिखे तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड इर्विनके १६ मार्चके पत्रकी एक प्रति गांधीजीको भेजी थी। वाइसरायने अपने पत्रमें हकोम अजमल खाँका स्मारक बनानेकी सराहनाको थी तथा अपना सहयोग देनेकी भी बात लिखी थी। २. उपलब्ध नहीं है। ३. जाकिर हुसैनने अपने पत्र लिखा था : ज्यों ही डॉ० अन्सारी लौट आयेंगे आशा है कि मैं जामिया संस्थापना समितिके सदस्योंको निमन्त्रण पत्र भेज सकूँगा । ( एस० एन० १४९१३ ) । Gandhi Heritage Portal