यन्त्र लेते ही आये थे उनका मेरी जाँच कर लेना स्वाभाविक ही था। जाँच करने पर उन्होंने मेरा स्वास्थ्य संतोषजनक पाया; सवेरे हृदयका आकुंचन १४९ तथा स्फुरण ९२ था तथा शामको आकुंचन १५२ और स्फुरण ९८।
हृदयसे आपका,
कलकत्ता
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३१२०) की फोटो–नकलसे।
१४६. पत्र : जाकिर हुसैनको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
२० मार्च, १९२८
आपका पत्र और लॉर्ड इर्विनके पत्रकी[१] प्रति मिली। ज्यादातर लॉर्ड इविनके पत्रकी वजहसे मेरे मसविदेके[२] अनुरूप ही पत्र भेजना दुगुना लाभप्रद होगा। निश्चय ही कुछ आवश्यक रद्दोबदल करने होंगे। आशा है डा॰ अन्सारी अन्तमें जो पत्र भेजेंगे, उसकी एक प्रति आप मुझे भेज देंगे।
मुझे नहीं मालूम कि देवदासने आपका ध्यान क्वार्टरोंकी सफाई व्यवस्थाकी उचित देखभाल किये जानेकी आवश्यकताकी ओर दिलाया है या नहीं। मैं चाहूँगा आप देवदासको कहें कि उसने जो कमियाँ देखी हैं, उन्हें बता दे।
आशा है कि आप निमन्त्रण–पत्र[३] भेजने और आश्रममें हम दोनोंने चर्चा करने के बाद जो कार्यक्रम तय किया था उसके अनुसार कार्य करनेमें देरी नहीं करेंगे।
हृदयसे आपका,
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३११९) की फोटो–नकलसे।
- ↑ १७ मार्चके अपने पत्रके साथ जाकिर हुसैनने डॉ॰ अन्सारीको लिखे तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड इर्विनके १६ मार्चके पत्रकी एक प्रति गांधीजीको भेजी थी। वाइसरायने अपने पत्र हकीम अजमल खाँका स्मारक बनानेकी सराहना की थी तथा अपना सहयोग देनेकी भी बात लिखी थी।
- ↑ उपलब्ध नहीं है।
- ↑ जाकिर हुसैनने अपने पत्र लिखा था : ज्यों ही डॉ॰ अन्सारी लौट आयेंगे आशा है कि मैं जामिया संस्थापना समितिके सदस्योंको निमन्त्रण पत्र भेज सकूँगा। (एस॰ एन॰ १४९१३)।