प्रिय सतीश बाबू, १४७. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २० मार्च, १९२८ यह बहिष्कार आन्दोलन एक खेदका विषय है। मैं चाहता हूँ कि मिलों और बहिष्कार पर लिखा मेरा लेख आप ध्यान से पढ़ें। मैं मिल-मालिकोंसे भी अपना सम्पर्क रख रहा हूँ । यदि मेरे तर्कमें आपको कोई कमी दिखाई दे तो उसकी ओर मेरा ध्यान दिलाने में आप तनिक भी संकोच न करें। मेरे स्वास्थ्यसे सम्बन्धित तार इस बार बिलकुल ही निन्दात्मक' था, था, क्योंकि उसका कोई आधार ही नहीं था । जहाँतक मैं जानता हूँ मेरा स्वास्थ्य कभी इससे अच्छा नहीं रहा । डा० अन्सारी और जमनालालजी राष्ट्रीय मुस्लिम विश्वविद्यालयसे सम्बन्धित अजमल खाँ स्मारकके सम्बन्धमें चर्चा करने आये थे, उसके अतिरिक्त उन्हें और कोई काम नहीं था । अंग्रेजी (एस० एन० १३१२१) की फोटो- नकलसे । हृदयसे आपका, चि० राधिका, १४८. पत्र : राधा गांधीको आश्रम मंगलवार [२० मार्च, १९२८ ] तुम्हारे सुन्दर पोस्टकार्ड मिल गये हैं। मैंने जो कहा था वह सब याद रखना । शरीरका खूब ध्यान रखना और सबपर प्रेम रखना । रूखी अच्छी हो रही है। पर अभी हिलती-डुलती है तो थोड़ा खून झलक आता है। डॉक्टर देख गया है। इस तरफकी कोई चिन्ता मत करना । दुर्गाको भी पत्र लिखनेको कहना और लिखवा देना । गुजराती (सी० डब्ल्यू ० ८६६८) से । । सौजन्य : राधाबहन चौधरी १. देखिए " हमारी मिलें क्या कर सकती हैं ?", १५-३-१९२८ । २. देखिए, " पत्र : वि० च० रायको ", २०-३-१९२८ । ३. ढाककी मुहरसे। बापूके आशीर्वाद Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१६६
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