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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१६८

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१३६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय जिन्होंने रेलें बिछाईं उन्होंने लोगोंका लाभ नहीं सोचा था। उन्होंने अपने दूर बैठे हुए हिस्सेदारों और मालिकोंके लाभकी ही बात सोची थी। अकालके समय रेलोंसे जो लाभ होता है वह उससे होनेवाली हानियोंकी बात सोचे तो पासंग पर चढ़ जाता है । यह तो ऐसा है जैसे कि कोई लुटेरा पहले मेरा सब कुछ लूट ले और फिर मुझे कुछ थोड़ा-सा वापस दे दे। रेलें न होनेपर क्या भारतकी स्थिति अधिक अच्छी होती ? मुझे इस बात में जरा भी सन्देह नहीं है कि भारतकी दशा अधिक अच्छी होती बशर्ते कि अन्य अपेक्षित बातें पूरी हो जातीं । रेलें लाभदायक कैसे बनाई जा सकती हैं ? रेलों सम्बन्धी नीति लोगोंके वास्तविक लाभको ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए अर्थात् वे लोगोंको उसी तरह स्वावलम्बी बना रहने दें जैसे कि वे रेलोंके आगमनसे पहले थे। आजकल उन्हें बुद्धि और स्वास्थ्य दोनोंमें दिवालिया बनाया जा रहा है । वे अपने कच्चे मालका अच्छेसे अच्छा इस्तेमाल करना जानते थे । वे अपनी रूईसे कपड़ा बनाते थे, खालोंसे जूते बनाते थे और अनाजसे रोटी बनाते थे। पर आज- कल इसका उलटा होता है। इससे अधिक बुरी कोई बात मैं मान ही नहीं सकता कि करोड़ों लोगोंको अपना कच्चा माल, जिससे वे स्वयं उत्पादन कर सकते हैं, विदेशोंको निर्यात करना पड़े और उससे बने मालका आयात करना पड़े। रेलें लाभप्रद ढंगसे ग्रामीणों द्वारा बनाई चीजें देशके एक भागसे दूसरे भागमें पहुँचा सकती हैं । लोगों को यह सब सिखाने के लिए बहुत बड़े आन्दोलनकी आवश्यकता है। पहले भी काफी मात्रामें अन्तर्प्रान्तीय व्यापार होता था । क्या विदेशी तरीका अधिक सस्ता नहीं है ? नहीं । और यदि वह सस्ता होता तो भी ज्यादा कीमतपर भी हमारा अपना उत्पादन उससे सस्ता पड़ता । उदाहरणार्थ आश्रममें जब हमने सब्जी पैदा करनी शुरू की तो प्रारम्भ में वह बाजारसे महँगी पड़ी। पर अब वह बाजारकी सब्जीसे अच्छी और सस्ती होती है तथा हमारे आश्रमवासियोंको काम भी मिल जाता है । क्या में स्पष्ट कहूँ ? बंगालमें मुझे बताया गया कि खद्दर ब्रिटिश कपड़े से अधिक महंगा और खुरदरा होता है और जो औरतें खद्दर पहननेका प्रण करती हैं वे विदेशी कपड़के बने अधो वस्त्र पहननती हैं । खद्दर खुरदरा है; किन्तु देशभक्ति इतना त्याग तो माँगती ही है। इसमें कोई शक नहीं कि जितनी खादी हम कुछ वर्ष पहले पैदा करते थे उससे अब कहीं ज्यादा पैदा करते हैं और काफी हदतक कीमतें कम करनेमें भी सफल हो गये हैं। आपको जिन महिलाओंके बारेमें बताया गया है, उनके सम्बन्धमें मैं केवल इतना ही कह सकता हूँ कि यदि उन्होंने खादी पहननेका व्रत लिया है तो उनके लिए किसी भी विदेशी कपड़ेका इस्तेमाल करना उचित नहीं है । आपके उद्देश्य और आदर्श क्या हैं ? मैं अहिंसा और सत्यके द्वारा अपने देशकी पूर्ण स्वतन्त्रता चाहता हूँ । Gandhi Heritage Portal