टिप्पणियाँ १४१ भावनासे प्रेरित होकर आपने यह भेंट भेजी है उसकी दृष्टिसे मैं इसकी बहुत कद्र करता हूँ । मैं इसका उपयोग एक ऐसे व्यक्तिकी आवश्यकताओंकी पूर्ति करनेमें कर रहा हूँ जिसने अपने आपको चरखेके प्रचारके लिए समर्पित कर दिया था । श्रीमती जोजेफ ए० ब्रॉन आर०एफ० डी० ३ बर्मिंघम मिशिगन, सं० रा० अ० अंग्रेजी (एस० एन० १४२६८) की फोटो - नकलसे । १५४. पत्र : पूँजाभाईको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती २१ मार्च, १९२८ चि० पूंजाभाई, तुम्हारा पोस्टकार्ड मिला। शनिवारकी शामको जरूर आ जाओ । यदि शामको समय न दे सका तो रविवारको दूंगा और तुम जिस समय चाहोगे उसी समय रवाना हो जाने दूँगा । तुम्हारा स्वास्थ्य अब बिलकुल ठीक हो गया होगा । गुजराती (जी० एन० ४००९) की फोटो नकलसे । १५५. टिप्पणियाँ चरखा एक प्रमाणित आवश्यकता बापूके आशीर्वाद संयुक्त प्रान्त में अकबरपुर एक छोटी-सी जगह है, जहाँ आचार्य कृपलानीके खादी-कार्यकर्त्ताओंके दलने सात साल तक काम किया है। कुछ कारणोंसे जिनका यहाँ जिक्र करनेकी कोई जरूरत नहीं है, इस दलको वहाँसे हट जाना पड़ा है । उसके हट जानेपर वहाँ जो करुण दृश्य देखने में आये और आखिर किसी-न-किसी तरह इस केन्द्रको क्यों जारी रखना पड़ा, इस सबका वर्णन पं० जवाहरलाल नेहरुने अ० भा० चरखा संघके नाम अपने निम्नलिखित रोचक पत्र में यों किया है :- मैं आपको पहले ही लिख चुका हूँ कि गांधी आश्रम अकबरपुरसे हट गया है । हमने अस्थायी रूपसे उसका भार ले लिया है, क्योंकि हमें ऐसा लगा १. आजका उत्तरप्रदेश । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१७३
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