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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१७६

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१४४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय गिना जायेगा और उन्हें यज्ञोपवीत पहननेके सभी अधिकार प्राप्त हैं। मगर मान भी लें कि उन्हें यज्ञोपवीत पह्ननेका धार्मिक अधिकार प्राप्त नहीं है, तो भी मैं यह सुननेको कभी तैयार नहीं था कि किसी रियासत में कानूनकी दृष्टिसे जनेऊ पहनना दण्डनीय अपराध माना जायेगा । और उतनी ही अकल्पनीय बात यह है कि जिन अभागे आदमियोंने सोचा था कि हमारा कोई ऐसा धार्मिक संस्कार हो रहा है, जो वांछनीय होगा या उनके लिए पुण्यप्रद होगा, उन्हें अपना बचाव करने, अपने गवाह तक पेश करनेका अधिकार नहीं दिया गया। अगर सजा और न्यायके इस ढकोसलेके बारेमें जो कुछ कहा गया है वह सच हो, तो मुझे यह जानकर कोई ताज्जुब नहीं होगा कि उनके शरीर परसे जनेऊ जबरन उतार लिये गये हैं। मैं आर्य समाजके सभापतिको आमन्त्रण देता हूँ कि वे बाघात रियासतके विरुद्ध अपने लगाये इल्जामोंके समर्थनमें और भी व्यौरेसे लिखें और अगर रियासतके अधिकारी चाहें तो उन्हें भी आमन्त्रण देता हूँ कि वे इस मामलेका अपना बयान भी भेजें जिसे मैं खुशी से छापूँगा । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया २२-३-१९२८ १५६. विदेशी वस्त्र बहिष्कार : कुछ प्रश्न एक मित्र, जिनका मिलोंसे गहरा सम्बन्ध है और जो विदेशी वस्त्र वहिष्कार आन्दोलनमें हमारी मिलोंको पूरा हिस्सा लेते देखना चाहते हैं, पूछते हैं :- १. आप किस आधार पर मालकी एक जैसी कीमत रखना चाहते हैं ? क्योंकि याद रखिये कि सभी मिलें एक सरीखी नहीं हैं; कुछ अच्छी हैं और कुछ बुरी, कुछ अन्य मिलोंकी अपेक्षा माँड़ आदि लगाकर अपने कपड़ेको ज्यादा सँवारती हैं; कुछका संचित कोष बड़ा है, कुछका कम; बम्बईकी मिलोंको और जगहों की मिलोंसे कम नफा होता है। ऐसे और भी बहुतसे अन्तर दिखलाये जा सकते हैं। ये तो केवल नमूने भर हैं । इसका एक सामान्य जवाब यह दिया जा सकता है कि 'जहाँ चाह है वहाँ राह भी है।' मिलें अपने हिस्सेका काम तभी पूरा कर सकेंगी, जब वे निष्कर्मण्यता छोड़ देंगी, खूब ध्यानसे सोचेंगी, और वह भी राष्ट्रके हानि-लाभकी दृष्टिसे, महज हिस्सेदारों, डाइरेक्टरों या एजेन्टोंकी ही जेबें भरनेकी दृष्टिसे नहीं। मगर इस बारेमें अपना मत स्पष्ट करनेके लिए मैं कह सकता हूँ कि उन सभी मिलोंको, जो बहिष्कार आन्दोलन में शामिल हों, सारा फर्क मिटाकर, एक समान कीमत निर्धारित करनी होगी, जिसका परिणाम यह होगा कि उनके मौजूदा नफेका एक बहुत बड़ा हिस्सा जाता रहेगा कमसे कम कुछ मिलोंका तो जरूर ही । अगर उनकी देशभक्ति सच्ची और प्रगतिशील हो तो मुनाफेमें चलनेवाली मिलें, नुकसान उठानेवाली मिलोंको सँभाल 13 Gandhi Heritage Portal