१५८. फीजी फोजीवालोंके लिए' यद्यपि दीनबन्धुने जो कुछ कहा है वह सत्य और मात्र सत्य है; किन्तु मुझे आशंका है कि यदि अंग्रेज साम्राज्यवादी शासक भारतीय प्रवासियोंको संसारके किसी भी भागमें आनेके लिए पर्याप्त प्रलोभन दें, तो भारतीय प्रवासी उसमें फँस जायेंगे और यह मान बैठेंगे कि वे 'समान भागीदार' हैं। उनकी समझमें यह नहीं आयेगा कि उनकी स्थिति मात्र शृगाल की है। किन्तु हम तो यही आशा करते हैं कि साम्राज्यवादी इतना प्रलोभन कभी न देंगे और भारतीय प्रवासी अपनी सहज बुद्धि द्वारा साम्राज्यवादियोंकी इस मायाके झीने आवरणके उस पार जो वास्तविकता है उसे साफ देख लेंगे । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया २२-३-१९२८ १५९. पत्र : पी० के० मैथ्यूको आश्रम प्रिय मित्र, साबरमती २२ मार्च, १९२८ मुझे खेद है कि मैं अवतक आपके पत्रका जवाब नहीं दे पाया। मैं चाहूँगा कि स्कूलोंके लिए चरखे उपयोगी नहीं हैं, इस चीजको समझने के लिए आप 'यंग इंडिया' के पिछले अंक पढ़ें। स्कूलोंमें तकलियोंका प्रचलन शुरू किया जाना चाहिए। अनुभवसे यह जाहिर हो गया है कि चरखेकी अपेक्षा तकलियाँ कुछ कारणोंसे, जो 'यंग इंडिया' ' में बताय गये हैं, हर दृष्टिसे ज्यादा अच्छा काम करती हैं उनके लिए आपको किन्हीं खास इमारतोंकी या कहने लायक जैसे खर्चकी जरूरत नहीं होती ] । हृदयसे आपका, श्री पी० के० मैथ्यू, बी० ए०, बी० एल० क्रिस्टावा महिलायम् अलवाई ( त्रावणकोर ) अंग्रेजी (एस० एन० १३१२४) की माइक्रोफिल्मसे । १. सी० एफ० एन्ड्यूजका इस शीर्षकका लेख यहाँ नहीं दिया जा रहा है २. देखिए खण्ड ३२, पृष्ठ २७ । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१८०
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