१६०. वृद्ध-विवाह बनाम बाल-विवाह एक गृहस्थ सूरतसे लिखते हैं : इसमें बाल-विवाहकी जो आलोचना की गई है, वह बहुत अंश तक सही है । लेखक अगर 'नवजीवन' के पिछले अंक पढ़ जायें तो उन्हें मालूम हो जायेगा कि 'नवजीवन' में बाल-विवाहकी सख्त टीका अनेक बार की गई है। मैं यह भी जानता कि उन लेखोंसे अनेक बाल-विवाह होते होते रुके भी हैं। पर उसमें अभी तक सुधार करनेकी काफी गुंजाइश है। वृद्ध-विवाहके प्रति जितनी अरुचि समाजमें है, उतनी बाल-विवाहके प्रति नहीं । मेरी दृष्टिसे तो दोनों वस्तुएँ जड़से खोद फेंकने लायक हैं। इसलिए बाल-विवाहके विरोध के बारेमें लेखकके और मेरे बीच मतभेद नहीं है । मेरे हाथमें सत्ता हो या मेरी कलममें यथेष्ट ताकत हो तो मैं उनका उपयोग प्रत्येक बाल-विवाहको रोकनेमें करूँ । जो माँ-बाप अपने लड़कोंका विवाह वचपन में करते हैं, वे उनसे दुश्मनी करते हैं और उन्हें पराधीन और अशक्त बना डालते हैं । किन्तु लेखकका उद्देश्य तो बाल-विवाहको निन्दा करके वृद्ध विवाहकी स्तुति करना जान पड़ता है। वृद्ध-विवाहके जो लाभ ये बतलाते हैं, वे हास्यजनक लगते हैं; इतना ही नहीं, उसमें तो बेचारी गरीब लड़कीके मनके भावोंका विचार भी नहीं किया गया है, यदि कुछ विचार किया गया है तो उसकी आर्थिक स्थितिकी हद तक ही किया गया लगता है । लगता है कि लेखक यह भूल ही गये हैं या उनकी दृष्टिमें इसका विचार ही अनावश्यक है कि जिन कन्याओंका विवाह वृद्ध पुरुषोंके साथ किया जाता है, उसमें उनकी सम्मति नहीं ली जाती। लेखकको तो इसका भान भी नहीं है कि विवाह धार्मिक विधि है और उनका यह भूल जाना उससे भी बड़ा दोष है कि वृद्ध-विवाह तो दुगुना बाल-विवाह है; क्योंकि वृद्ध-विवाहमें कन्या तो बालिका होती ही है और जो वृद्ध पुरुष वृद्ध होनेपर भी विवाह करनेका विचार करता है, वह बालक बल्कि उससे भी कम माना जायेगा । कन्या तो, वरके जीते हुए भी एक तरहसे विधवा ही गिनी जायेगी । जो बूढ़े पुरुष अपने विकारोंको रोकने में असमर्थ हों और इसलिए अथवा किसी दूसरे कारणसे विवाह करनेको तैयार हों, वे अपने ही जैसी किसी वृद्ध स्त्रीसे या बड़ी उम्रकी किसी ऐसी स्त्रीसे विवाह करें जो बूढ़ेसे सम्बन्ध जोड़नेको तैयार हो तो समाजकी कमसे कम हानि होगी । जिस लेखका उल्लेख एक गरीब लड़की बच गई। थे, उन्होंने वह लेख देखकर धन्यवाद ऊपर किया गया है उसका परिणाम यह हुआ है कि क्योंकि जो वृद्ध पुरुष लड़कीसे विवाह करने को तैयार हुए अपनी मूल समझी और फिरसे विवाह करनेका विचार छोड़ दिया। इस शुभ परिणामके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूँ। हम यही उम्मीद १. पत्र यहाँ नहीं दिया जा रहा है। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१८१
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