१५० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय करें कि वे फिरसे जब-जब विकारवश होंगे, तब लड़कीके, समाजके और देशके हितका विचार करेंगे, ईश्वरका स्मरण करेंगे और शान्त हो जायेंगे। इस दृष्टान्तसे समाज- सेवक और भी उत्साहित हों। हम इससे और ऐसे ही दूसरे दृष्टान्तोंसे समझ सकते हैं कि मर्यादाका पालन करते हुए दृढ़तापूर्वक और समुचित अवसर पर अगर समाजमें होनेवाले या दूसरे अन्यायोंके विरुद्ध आवाज उठायें तो अन्यायको रोका जा सकता है । दूसरी गाय बचेगी ? कितनी ही बालिकाएँ बूढ़ोंके हाथ बिकनेसे बच गई हैं इस बातको ध्यानमें रखते हुए रानपुरके एक गृहस्थ लिखते हैं । " इस पत्रको देखते हुए मैं भावनगरके मोढ़ वणिक भाईसे अवश्य यह प्रार्थना करूँगा कि वे यह विवाह न करें। पचपन वर्षकी उम्र में जो बालिका उनकी पौत्री होनेके लायक है उससे विवाह करते समय उन्हें काँपना चाहिए। मैं आशा करता हूँ कि भावनगरकी मोढ़ जातिके सेठ भी इस विवाहको रोकनेके लिए जो कुछ करना चाहिए, करेंगे । सच तो यह है कि जहाँ जनता जागृत है वहां ऐसे मामलों में सिर्फ छोटी जातियोंके सेठ ही नहीं वरन सभी लोग, यहाँ तक कि राज्य भी इन बालिकाओंका रक्षक है और इस प्रकार बेची जा रही बालिकाओंको बचाना उनका धर्म है। युवकवर्ग उन सबका चौकीदार है। इसमें कोई शक नहीं है कि जहाँ युवक वर्ग नीति, विनय और वीरताका कवच पहनकर अपने कर्तव्यका पालन करेगा वहाँ सभी गरीब गायोंकी रक्षा हो सकेगी और होनी भी चाहिए । [ गुजरातीसे ] नवजीवन २५-३-१९२८ १६१. पत्र : रिचर्ड बी० ग्रेगको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २६ मार्च, १९२८ प्रिय गोविन्द, तुम्हारा सहज बातचीतके रससे युक्त पत्र मिला। मुझे खुशी है कि तुम बगैर किसी तकलीफके उतना फासला चलकर तय कर सके। मैं ठीक हो रहा हूँ। तुमने एनिमाके बारेमें जो कुछ लिखा है, उसपर मैंने गौर किया है। बंगलोरमें जिन डाक्टरोंने मुझे सलाह दी, उन्होंने परमैगनेट पर जोर दिया था, लेकिन घोल बहुत पतला है । ठीक गुलाबी रंगके घोलकी जरूरत होती है । २. पत्र यहाँ नहीं दिया जा रहा है। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१८२
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