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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१८३

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पत्र : के० एस० आचार्यको १५१ गणेशनके यहाँ तुम्हारी किताबकी छपाईका काम कैसा चल रहा है ? उसके कब तक तैयार हो जानेकी उम्मीद है ? तुम सबको सस्नेह, अंग्रेजी (एस० एन० १३१२८) की फोटो - नकलसे । १६२. पत्र : के० एस० आचार्यको हृदयसे तुम्हारा, सत्याग्रह आश्रम साबरमती २६ मार्च, १९२८ प्रिय मित्र, आपका पत्र मिला । सादगी तो हृदयकी चीज है। लेकिन इसकी आड़ में हम स्वयं अपनेको धोखा न देने लगें अतः आदर्श यह है कि कोई भी ऐसी चीज जिसे संसारका गरीब से गरीब व्यक्ति न रखता हो, हम अपने पास न रखें । आप अपनी पत्नीको उसकी इच्छाके विरुद्ध गहने त्याग देनेके लिए मजबूर नहीं कर सकते। लेकिन आपको अपने वासनाविहीन निस्स्वार्थ प्रेमके द्वारा और अपने दिन-ब-दिन बढ़ते आत्मनिग्रहके द्वारा उसे राजी कर लेनेकी कोशिश करनी चाहिए । अपने पिताका त्याग किये बिना और हमेशा उनकी सेवा करनेके लिए तैयार रहते हुए भी आप उनसे अलग रह सकते हैं और एक अछूत बच्चेको उस तरह पाल सकते हैं जिस तरह आपने सुझाव रखा है। मुझे खेद है कि मैं आपकी बहनको नहीं ले सकूंगा क्योंकि वह हिन्दुस्तानी नहीं जानती होगी। आप उसे वहाँ वह सब प्रशिक्षण दें, जिसकी उसे जरूरत है । हृदयसे आपका, श्रीयुत के० एस० आचार्य सहायक अध्यापक गवर्नमेंट हाईस्कूल देवनगिरी अंग्रेजी (एस० एन० १३१२७) की माइक्रोफिल्मसे । Gandhi Heritage Portal