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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१८९

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भाषण : हरिजनोंकी सभा में १५७ मैं आपकी अपेक्षा पाखाना ज्यादा अच्छी तरह साफ कर सकता हूँ, परन्तु आप मुझे वैसा नहीं करने देते । यह ठीक नहीं है । आपको दूसरोंको यह काम करनेसे क्यों रोकना चाहिए ? उच्च वर्णके लोग आपके कामको हीन हलका मानते हैं; परन्तु मेरी यह दृढ़ धारणा है कि आपका काम सबसे अच्छा है । हम जबतक यह काम अच्छी तरह नहीं कर सकते तबतक यह नहीं कहा जा सकता कि हमने ठीक-ठीक सेवा की है। आज अहमदाबादकी सड़कों और गलियोंकी क्या हालत है ? मैं तो सभी कुछ अपने हाथसे साफ करनेवाला हूँ इसलिए यह सब आपसे कहता हूँ । आपको तो मनमें यह सोचना चाहिए कि इस कार्यके द्वारा आप शहरकी सबसे बड़ी और जरूरी सेवा कर रहे हैं। इस सेवा कार्यमें दूसरे लोग भी भाग लें, इसमें आपको क्या आपत्ति हो सकती है ? यदि मेरे वश में हो तो अहमदाबादकी गलियाँ और पाखानें हाई स्कूलके विद्यार्थियोंसे साफ कराऊँ और अहमदाबादको इतना सुन्दर शहर बना दूं कि दूसरोंसे कह सकूं कि हमारे शहरको देखो। इसकी चाबी तो आपके हाथमें है । आप इसे सेवा कार्य समझें और इसे मनसे करें, क्योंकि शहरकी तन्दुरुस्ती मुख्यतः इसीपर निर्भर है। यदि आप यह बात समझ लें तो श्री वल्लभभाईकी बहुत-सी समस्याएँ हल हो जायें और शहर निवासी आपकी प्रशंसा करें। आप अपने कार्यसे बड़े लोगोंको भी लज्जित कर सकते हैं । शराबका व्यसन कम हो गया इस बातपर मुझे विश्वास नहीं आता। मैं यह मानता हूँ कि न पीनेवाले दो आना और पीनेवाले १४ आना है । मैं आपसे शराबकी लत छोड़ देनेकी सिफारिश करता हूँ। मैं यह नहीं मान सकता कि कोई मनुष्य भोजनके लिए कर्ज लेगा । यह तो सिर्फ मौज-मजा उड़ानेके लिए ही किया जाता है। आपको अपने सभी व्यसनोंका त्याग करना चाहिए । अन्तमें मैं आप सबसे यही कहूँगा कि जूठनका त्याग करें और अपने बच्चोंको भी यही सिखायें । उनके साथ आप भी यही प्रतिज्ञा करें। जो वस्तु बिना अपमानके सहज ढंगसे प्राप्त हो उसीको लें। ऐसा करके आप अपने बालकोंको अच्छी शिक्षा दे सकेंगे। चाहे आपको पढ़ना न आता हो, तो भी आप गिनती तो सीख ही लें, ताकि कोई आपको धोखा न दे सके। आपको शौच-शुद्धिके नियम भी समझ लेने चाहिए और समाज के नेताओंसे आत्म-शुद्धि करना सीखना होगा। उसके लिए आपको अपने सभी व्यसन छोड़ देने होंगे । खादीकी टोपी पहन लेनेपर भी यदि आपमें यह दुर्व्यसन विद्यमान हों तो यह खादीकी टोपीके लिए शर्मकी बात है । आप जहाँ जो कुछ भी करेंगे उसीमें आपको नगरपालिका और अहमदाबादके समाजके अगुओंसे अच्छी सहायता प्राप्त करवाऊँगा । [ गुजरातीसे ] प्रजाबन्धु, १-४-१९२८ १. वल्लभभाई इन दिनों अहमदाबादमें नगरपालिकाके प्रधान थे । Gandhi Heritage Portal