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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१९०

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प्रिय माधवन्, १७१. पत्र : एम० टी० के० माधवन्‌को आश्रम साबरमती २८ मार्च, १९२८ आपका पत्र मिला । आपने मुझे वहाँके हालातोंकी निराशाजनक तस्वीर भेजी है। अभी फिलहाल आपके लिए मेरी सलाह यह है कि आप वहाँ चुपचाप जनमत तैयार करते रहिये । आपने जो कुछ लिखा है उससे मुझे ऐसा लगता है कि सरकारका रवैया सहानुभूति-शून्य नहीं है, लेकिन उसमें साहसकी कमी है और उसपर कट्टर सनातनी मतका बहुत ज्यादा असर होता है। आपको मुझे यह भी बताना चाहिए कि क्या आप शुचिन्द्रम या थिरूवारप्पूमें सत्याग्रह करनेके लिए तैयार हैं । श्रीयुत टी० के० माधवन् एस० एन० डी० पी० योगम् वाइकोम ( त्रावणकोर राज्य) अंग्रेजी (एस० एन० १२८९३ - ए) की माइक्रोफिल्मसे । हृदयसे आपका, १७२. पत्र : एम० देवनदास नारायणदासको आश्रम साबरमती प्रिय मित्र, २८ मार्च, १९२८ आपके दो पत्र मिले। आपका नाम मैं प्रबन्धक मण्डलके सामने रख सकूँ, इसके पहले मुझे उतनी जानकारीसे कहीं ज्यादाकी जरूरत होगी, जितनी कि आपने अपने पत्रमें दी है। आपको अपनी उम्र, आपके माता-पिता जीवित हैं अथवा नहीं, आपका भावी लक्ष्य क्या है, जरूर लिखना चाहिए। जबतक आपने कराचीमें कमसे कम ६ महीने तक निम्नलिखित कामोंमें अपनी परीक्षा न ले ली हो, आप किसी भी तरहसे दाखिल नहीं किये जा सकते । Gandhi Heritage Portal