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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१९२

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१७४. पत्र : एच० एन० वेनको आश्रम साबरमती प्रिय मित्र, २८ मार्च, १९२८ आपका सुखद पत्र मिला । श्री एण्ड्रयूज मुझे आपके आश्रम आकर मुझे मिलने के इरादेकी बात बताना भूल गये । ८ अप्रैलको आपसे मिलकर मुझे खुशी होगी। यदि इससे आपके लिए कोई फर्क न पड़ता हो तो ५ के बजाय शामके ४ बजेका समय रखिये। लेकिन आपके लिए मैं ५ बजे भी तैयार रहूँगा । श्री एच० एन० वेन मेडेन्स होटल दिल्ली अंग्रेजी (एस० एन० ११९७०) की फोटो नकलसे । १७५. पत्र : राजगोपालाचारीको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती २८ मार्च, १९२८ प्रिय च० रा०, प्रस्तावित यूरोप यात्राके सम्बन्धमें आपका पत्र मुझे मिला। खुद मेरा मन भी उसके लिए राजी नहीं है और न ही मुझे खुद अपने-आपमें ऐसा विश्वास है कि मैं उसे सफल बना सकूंगा; लेकिन रोमाँ रोलाँसे मुलाकातका एक आकर्षण अब भी है । पश्चिममें मेरी जितनी भी ख्याति है, वह उनके ही कारण है और मुझे लगता है कि अगर मैं उनसे आमने-सामने मिलूँ तो कई बातों में निराशा हो सकती है। यह भी हो सकता है कि हम एक-दूसरेके इतने करीब खिंच जायें जितने कि पहले कभी नहीं थे । मैं इस चीजको जरूर काफी महत्वकी मानता हूँ कि हम एक-दूसरेको जितना जानते हैं उससे ज्यादा अच्छी तरहसे जानें । मैं आपकी इस बातसे बिलकुल सहमत हूँ कि स्वास्थ्यकी दृष्टिसे कुछ लाभ नहीं होनेवाला है । हो सकता है कि मुझे कुछ कष्ट ही मिले और इस प्रस्तावित यात्राके Gandhi Heritage Portal