पत्र : च० राजगोपालाचारीको १६१ पीछे स्वास्थ्यका कोई विचार नहीं है । उस दृष्टिसे तो भारतका कोई पर्वतीय स्थान मेरे लिये कहीं ज्यादा अच्छा रहेगा । आपकी तरह मुझे भी ऐसा लगता है कि मेरी अनुपस्थितिके कारण हमारा कार्य यहाँ कुछ डगमगा सकता है, खास करके बारडोलीमें । मेरी नामौजूदगी में विदेशी वस्त्र बहिष्कार निश्चय ही खास आगे नहीं बढ़ सकता है। लेकिन अब चूंकि आप सब लोग कलकत्ते में एक-साथ इकट्ठा हो ही रहे हैं, मैं चाहूँगा कि आप कौंसिलकी बैठक में प्रस्तावित यात्रापर चर्चा करें। मैं चाहता हूँ कि मिलने-जुलनेके मामलेमें मेरा दायरा बहुत ही इने-गिने व्यक्तियों तक सीमित न हो जाये। और मैं इतना नम्र रहूँ कि सत्य तक पहुँच सकूं, चाहे वह किसी भी स्रोतसे क्यों न आये । पैसा हड़पने के मामलोंके लिए मुझे खेद है, लेकिन मैं आपकी इस चेतावनीको मानूंगा कि मैं स्वयंको परेशानी में न डालूं और न ही उनकी चर्चा करूँ । रामचन्द्रन के बारेमें आप जो कुछ कहते हैं, मैं समझ गया हूँ। मैं चाहता हूँ कि आप उन्हें एक स्नेह-भरा पत्र लिखें और उनको अपनी तरफ खींचनेके लिए हर तरहसे प्रयत्न करें। वह एक तरहके 'चेट्टी' मी हैं। क्योंकि उन्होंने जामिया में खादीके लिए बहुत अच्छा काम किया था । आपने पैसा हड़पनेके जिन मामलोंका उल्लेख किया है, उनके बारेमें मुझे एक बात लिखना बिलकुल नहीं भूल जाना चाहिए। यदि दोषी व्यक्ति आपको ५०० रु० दे देता है और प्रकाशनके लिए एक लिखित क्षमा याचना आपको दे देता है, तो आपको पूरी तरह सन्तोष हो जाना चाहिए। लेकिन यह तो एक सामान्य व्यक्तिको बिना विचारे दी गई राय है । केवल दूध पर रहनेके मेरे इस साहसपूर्ण प्रयोगके बारेमें आपको क्या कहना है ? हाँ मैं यह नहीं सुनना चाहता कि इस खबरको सुनकर कि वह वास्तवमें दूध और पानीका ही प्रयोग है, आप सचमुच मूर्छित हो गये । अंग्रेजी (एस० एन० १३१२३) की फोटो - नकलसे । हृदयसे आपका, ३६-११ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१९३
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