१७६. पत्र : अरुलमणि पिचमुथुको आश्रम साबरमती, प्रिय मित्र, २८ मार्च, १९२८ आपका बीमा शुदा छोटा-सा पार्सल आपके पत्रसे पहले मिला और मैं सोच रहा था कि यह किसने भेजा है। महादेवने ठीक अन्दाज लगा लिया था । आपने बहुमूल्य जवाहरातोंका जिस ढंगसे उपयोग किया, उसके लिए मैं आपको बधाई देता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि किसी तरीकेसे किसी रूपमें मैं इस उपहारकी, आपका नाम जाहिर न करते हुए 'यंग इंडिया " के पृष्ठोंमें चर्चा करूँगा । डा० अरुलमणि पिचमुथु पंथाडी नं० १, मदुरा अंग्रेजी (एस० एन० १३१३४) की फोटो - नकलसे । १७७. पत्र : सैम हिगिन बॉटमको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती २८ मार्च, १९२८ प्रिय मित्र, जब जमुना किनारेका आपका फॉर्म देखनेका सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ था, ऐसा याद पड़ता है कि तब मैंने एक ऐसा साधन देखा था जिसके जरिये आप सूर्यकी गर्मीसे अपना पानी गरम करते थे। क्या आप कृपया मुझे बतायेंगे कि वह आपकी इमारतके ऊपर बना हुआ मात्र एक हौज था जो पूरी तरह धूपमें खुला रहता था या कि आप किसी यान्त्रिक विधिसे सूर्यकी किरणोंको हौजपर संकेन्द्रित करते थे । सँम हिगिनबॉटम महोदय ऐग्रीकल्चरल इन्स्टीटयूट इलाहाबाद अंग्रेजी (एस० एन० १३१३७) की फोटो नकलसे । १. देखिये " टिप्पणियाँ ", ५-४-१९२८, को उपशीर्षक "स्त्रियाँ और गहने " । हृदयसे आपका, Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१९४
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