राष्ट्रीय सप्ताह १६५ अच्छा हो यदि ब्रिटिश मालके बहिष्कारकी पुकारका समर्थन करनेवाले लोग अपने कार्यक्रम पर गम्भीरतापूर्वक विचार करें और जरूरत जान पड़नेपर अपनी योजनाको बदलें और इस हार्दिक विश्वासके साथ खादी आन्दोलनमें शरीक हों, कि केवल खादीसे ही, सिर्फ ब्रिटिश कपड़ेका ही नहीं, सभी तरहके विदेशी कपड़ेका पूरा-पूरा बहिष्कार निष्पन्न हो सकता है ? वे यह करें या न करें, मुझे विश्वास है कि वे ब्रिटिश कपड़ेके सिवाय अन्य विदेशी कपड़े के समर्थनको सिद्धान्त बनाकर नहीं बैठे हैं। अगर मेरी यह मान्यता ठीक हो तो, उनको चाहिए कि वे राष्ट्रीय सप्ताह में खादीकी बिक्रीका समर्थन करें। अगर वे सिर्फ पिछले सात वर्षोंमें हुई खादी आन्दोलनकी प्रगतिका अध्ययन करें तो वे इतना जरूर ही समझ जायेंगे कि चरखेमें कल्पनानीत शक्ति है। अगर देशके राजनीतिक दृष्टिसे जागृत लोग उसका पूरे मनसे सक्रिय समर्थन करें तो वह मिलोंकी सहायताके बिना भी विदेशी वस्त्रोंका बहिष्कार सफल करनेमें समर्थ हो सकती है। मिलोंकी सक्रिय और संगठित सहायतासे तो विदेशी वस्त्रका बहिष्कार बहुत ही सहज काम हो जाता है। सच पूछिए तो इसकी कुंजी मिलवालोंके हाथमें है, अलबत्ता उन्हें राष्ट्रके हितकी दृष्टिसे काम करना चाहिए। उनके साथमें एक बना बनाया और व्यापक संगठन है, जिसका उपयोग अगर वे राष्ट्रकी सेवाके लिए करें तो वह बहिष्कार आन्दोलनको बहुत कुछ आसान बना सकता है और राष्ट्रको ऐसी शक्ति दे सकता है, जिसकी उसे बड़ी जरूरत है। फिर हिन्दू तथा मुसलमानोंको भी उन बहुमूल्य सात दिनोंकी याद क्यों नहीं करनी चाहिए और क्यों सारे भय, पारस्परिक अविश्वास तथा निर्बलताको तिलांजलि नहीं दे देनी चाहिए ? मुझे उन अछूतोंकी बात भी नहीं भूलनी चाहिए, हम हिन्दू लोग जिन्हें आज तक दबाते रहनेका अपराध करते आये हैं। क्या हम यह नहीं देख सकेंगे कि अपने छठवें अंशको (भले ही यह संख्या इससे कम या ज्यादा हो) गिराकर हमने अपने आपको ही नीचे गिराया है ? कोई आदमी खुद गड्ढे में उतरे बिना और स्वयं पापका भागी हुए बिना दूसरेको गिरा नहीं सकता । दलित लोग पापके भागी नहीं हैं। दबाने के पापका जवाब तलब किया जायेगा तो उन्हीं लोगोंसे जो दूसरोंको नीचे दबाकर रखे हुए हैं। [अंग्रेजीसे] यंग इंडिया २९-३-१९२८ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/१९७
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