१६८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय पड़ रहा है। उन्हें मालूम होना चाहिए था कि सन् १९२०-२१ में विद्यार्थियों को उनके स्कूलों, कालेजोंसे बाहर निकालने और ऐसा राजनीतिक काम करनेको कहने में जिसमें जेल जानेका भी खतरा था, मेरा हाथ कुछ कम नहीं था । मेरी समझमें अपने देशके राजनीतिक आन्दोलनमें आगे बढ़कर हिस्सा लेना उनका स्पष्ट कर्त्तव्य है । सारे संसार में विद्यार्थी ऐसा ही कर रहे हैं । हिन्दुस्तानमें जहाँकि अभी हाल तक राजनीतिक जागृति दुर्भाग्यवश केवल थोड़े-से अंग्रेजीदाँ लोगों तक ही सीमित रही है, यह उनके लिए और भी कर्तव्य रूप बन जाता है। चीन और मिस्रमें तो राष्ट्रीय आन्दोलन विद्यार्थियोंकी ही बदौलत चल सके हैं। हिन्दुस्तानमें भी वे कुछ कम काम नहीं कर सकते हैं । प्रधानाचार्य महोदय इस बात पर जोर दे सकते थे कि विद्यार्थियोंके लिए अहिंसाके नियमोंका पालन करना तथा हुल्लड़बाजोंके कहने में चलनेके बदले उनको काबू में रखना जरूरी है । मॅकॉलेका सपना मैकॉलेका 'जीवन चरित्र और पत्र' नामकी अंग्रेजी पुस्तकमें से एक मित्रने मेरे पास नीचे लिखा उद्धरण भेजा है : " हिन्दुस्तानके वतनी लोगोंमें यूरोपीय साहित्य और विज्ञानका प्रचार- प्रसार करना ब्रिटिश सरकारका महान ध्येय होना चाहिए -- यह निश्चय लॉर्ड विलियम बेंटिकने ७ मार्च, १८३५ को किया ।... और मैकॉलेने अध्यक्ष के रूपमें अपना काम शुरू कर दिया । लॉर्ड मेकॉलेने कहा कि, हमारी अंग्रेजी शालाएँ आश्चर्यजनक ढंगले प्रगति कर रही हैं . . हिन्दुओंपर इस शिक्षासे होनेवाले असर की सीमा नहीं है। अंग्रेजी शिक्षा पाया हुआ एक भी हिन्दू कभी अपने धर्ममें श्रद्धावान् नहीं रहता । कुछ लोग एक युक्ति के तौरपर उसका नाम लेते रहते हैं; मगर ज्यादातर लोग धर्म के मामलेमें अपनेको बिलकुल स्वतन्त्र कहते हैं और कुछ ईसाई धर्म स्वीकार कर लेते हैं। मेरा यह पक्का विश्वास है कि यदि हमारी शिक्षाकी योजनाओंपर अमल किया गया, तो आजसे ३० साल बाद बंगालके प्रतिष्ठित वर्गो में एक भी मूर्तिपूजक नहीं रहेगा।... " मैं नहीं कह सकता कि मैकॉलेका यह सपना कि अंग्रेजी शिक्षा पाया हुआ हिन्दुस्तान अपने धार्मिक विश्वास छोड़ देगा अथवा नहीं; सच्चा निकला है या नहीं । लेकिन हम यह भी जानते हैं कि उनका एक और सपना था -- अंग्रेजी शिक्षा पाये हुए हिन्दुस्तान द्वारा अंग्रेज हाकिमोंके लिए कारकून वगैरा तैयार करना । यह सपना सचमुच उनकी आशाओंसे भी अधिक सच निकला है । १. केवल अंशःत उद्धृत । उद्धरणके केवल कुछ अंश ही यहाँ दिये जा रहे हैं। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२००
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