१७२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय स्वयं निर्णय करनेका है। इससे पहले कि वह, जैसा कि मेरे मनमें है, आदेशका उल्लंघन करें, उन्हें यह आन्तरिक विश्वास अवश्य होना चाहिये कि आदेशका उल्लंघन कर्त्तव्य है और आदेशके उल्लंघनके लिए कारावास कोई बोझ नहीं अपितु हर्षका विषय है । और यह तभी सम्भव है जब ऐसे कारावास कोई व्यक्ति अपने लिये और राष्ट्रीय उत्थानके लिए प्रेरणा देनेवाला समझे । परन्तु वास्तव में किया क्या जाना चाहिए, इस विषय में मैं पूरे भरोसेके साथ कुछ नहीं कह सकता। आप धीरेनको मुझसे ज्यादा अच्छी जानती हैं। फिर भी धीरेन ज्यादातर तो वही करेंगे जैसा कि आप उनसे करवाना चाहेंगी। आप यह भी अवश्य सोच समझ लें कि आप उनके कारावास और कष्टोंको किस हदतक बर्दाश्त करेंगी; इसके बाद ही कोई निर्णय करें। यदि धीरेन निष्कासनके आदेशको स्वीकार कर लें तो वह निश्चय ही आश्रममें आयें और वह जबतक उनकी इच्छा हो यहाँ रहें। उन जैसे युवकोंके लिए यहाँ हमेशा ही काम रहता है । प्रस्तावित यात्राके बारेमें अभी कुछ निश्चित नहीं है । तरह श्रीमती उर्मिला देवी ४ ए नफर कुण्डु रोड कालीघाट, कलकत्ता अंग्रेजी (एस० एन० १३१२६) की फोटो नकलसे । हृदयसे आपका, १८५. पत्र : अखिल भारतीय चरखा संघ के सचिवको प्रिय महोदय, सत्याग्रह आश्रम साबरमती ३० मार्च, १९२८ निजी एजेन्सियोंके सम्बन्ध में लिखे गये, आपके २८ मार्च पत्र संख्या २१६९ के सन्दर्भ में, एकदम कोई राय दे पाना कठिन है। मैं इसे आवश्यक मानता हूँ कि निजी एजेन्सियोंपर अधिक अंकुश लगानेकी शक्ति प्राप्त कर ली जाये। इससे पहले कि मैं कुछ सलाह दूं, यह अच्छा रहेगा कि तमिलनाड एजेन्सीसे ठोस सुझाव प्राप्त कर लिये जायें। हृदयसे आपका, सचिव अ० भा० च० संघ अहमदाबाद अंग्रेजी (एस० एन० १३१३९ ) की माइक्रोफिल्मसे । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/२०४
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